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नई AHA गाइडलाइंस: कोलेस्ट्रॉल पर बचपन से हमला, दिल की बीमारी रोकने का नया तरीका

हेल्थ डेस्क, मुस्कान कुमारी।

वाशिंगटन। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में बड़ा बदलाव करते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब फोकस उम्र के शुरुआती दौर से ही 'खराब' कोलेस्ट्रॉल (LDL) को काबू में रखने पर है, ताकि धमनियों में प्लाक जमा होने से पहले ही दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी बीमारियों को रोका जा सके।

ये गाइडलाइंस 2018 की पुरानी सिफारिशों को पूरी तरह बदल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनभर के जोखिम को ध्यान में रखते हुए जल्दी कार्रवाई से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

PREVENT कैलकुलेटर से नया रिस्क आकलन

नई गाइडलाइंस में पुराने टूल्स की जगह PREVENT कैलकुलेटर को अपनाया गया है। यह 30 से 79 साल के लोगों के लिए 10 साल और 30 साल का एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवस्कुलर डिजीज (ASCVD) रिस्क बताता है। इसमें उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग के साथ-साथ किडनी स्वास्थ्य को भी शामिल किया गया है।

रिस्क को चार स्तरों में बांटा गया है – कम (3% से नीचे), बॉर्डरलाइन (3-5%), इंटरमीडिएट (5-10%) और हाई (10% से ज्यादा)। बॉर्डरलाइन मामलों में कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) स्कैन की सलाह दी गई है। CAC स्कोर जीरो होने पर सतर्क निगरानी, जबकि 100 से ऊपर होने पर तुरंत मजबूत इलाज जरूरी माना गया है।

एक बार सभी वयस्कों में Lp(a) और apoB टेस्टिंग की भी सिफारिश की गई है, जो आनुवंशिक जोखिम को उजागर करती है।

स्पष्ट LDL लक्ष्य तय
गाइडलाइंस में LDL के साफ टारगेट दिए गए हैं:

- बॉर्डरलाइन या इंटरमीडिएट रिस्क में प्राइमरी प्रिवेंशन के लिए LDL 100 mg/dL से नीचे
- हाई रिस्क प्राइमरी केस में 70 mg/dL से नीचे
- बहुत हाई रिस्क (जैसे हार्ट अटैक के बाद) में 55 mg/dL से नीचे

स्टैटिन दवाएं पहली पसंद बनी हुई हैं। हाई रिस्क ग्रुप में कम से कम 50 प्रतिशत LDL कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अगर लक्ष्य पूरा न हो तो ईजेटिमाइब, PCSK9 इनहिबिटर्स, बेम्पेडोइक एसिड या इनक्लिसिरन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।

बच्चों और युवाओं पर खास ध्यान

कोलेस्ट्रॉल से नुकसान बचपन में ही शुरू हो जाता है। इसलिए सभी बच्चों की 9-11 साल की उम्र में स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो या मोटापा जैसी समस्या हो तो और पहले टेस्ट करवाने की सलाह है।

30 साल से कम उम्र के युवाओं में अगर LDL 160 mg/dL या उससे ज्यादा हो या फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया हो तो स्टैटिन तुरंत शुरू करने की सिफारिश की गई है। इससे जीवनभर LDL का कुल प्रभाव कम होता है और भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा काफी घट सकता है।

जीवनशैली बनी रहे नींव

दवाओं से पहले स्वस्थ आदतें सबसे महत्वपूर्ण हैं। वजन में 5 प्रतिशत या उससे ज्यादा कमी, हफ्ते में 150 मिनट मध्यम व्यायाम (तेज चलना या योगा), सब्जी-फल और साबुत अनाज से भरपूर डाइट, धूम्रपान छोड़ना और अच्छी नींद – ये बदलाव अकेले LDL को 10-30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

डायबिटीज, किडनी बीमारी, एचआईवी या कैंसर वाले मरीजों के लिए स्टैटिन को क्लास-1 सिफारिश दी गई है। साउथ एशियन मूल के लोगों में जोखिम ज्यादा होने के कारण अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।

इलाज शुरू करने के 4-12 हफ्ते बाद लिपिड जांच करानी चाहिए और फिर हर 3-12 महीने में समीक्षा करनी चाहिए।

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव

अमेरिका में हर चार में से एक वयस्क का LDL स्तर ऊंचा है, जो दिल की बीमारियों की बड़ी वजह बन रहा है। नई गाइडलाइंस जल्दी स्क्रीनिंग और लक्षित इलाज पर जोर देकर भविष्य के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं। क्लिनिकल अध्ययनों से साबित है कि कम उम्र से LDL नियंत्रित रखने से जीवनभर का खतरा आधा तक घट जाता है।