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नई टास्क फोर्स पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

  • नई टास्क फोर्स पर कांग्रेस का सवाल, पुरानी 101 सिफारिशें अधूरी

नई दिल्ली। शिक्षा सुधारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा नई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि सुधारने की कोशिश प्रतीत होता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पहले गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किए बिना नई टास्क फोर्स बना रही है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को जारी बयान में कहा कि जून 2024 में नीट-यूजी सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति को परीक्षाओं के संचालन को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

उन्होंने कहा कि डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने विस्तृत अध्ययन और विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श के बाद कुल 101 सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं। इन सिफारिशों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करना, जवाबदेही तय करना और छात्रों का विश्वास बहाल करना था। कांग्रेस का दावा है कि इन सिफारिशों का बड़ा हिस्सा अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

जयराम रमेश ने कहा कि ऐसी स्थिति में नई टास्क फोर्स का गठन कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि पहले से उपलब्ध सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई समितियां बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि देश के लाखों छात्र निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की उम्मीद करते हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता नई घोषणाएं करने के बजाय पहले से तैयार सुधारात्मक उपायों को जमीन पर लागू करना होनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, केवल नई संस्थाएं या टास्क फोर्स गठित करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि उनके सुझावों का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।

पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की कि डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सभी 101 सिफारिशों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन सुझावों को लागू किया गया है तथा किन पर अभी कार्रवाई बाकी है। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।