Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नीतीश की हरकत से आहत डॉक्टर ने सरकारी जॉब से इस्तीफा दिया

स्टेट डेस्क - प्रीति पायल 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संबंधित एक संवेदनशील मामला 15 दिसंबर 2025 को पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में सामने आया।

आयुष चिकित्सकों (आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी) को नियुक्ति पत्र सौंपने का आयोजन किया गया था, जिसमें 1283 डॉक्टरों को नियुक्ति दी जा रही थी। मंच से कुछ चयनित चिकित्सकों को सीएम स्वयं नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। जब डॉ. नुसरत परवीन (जो हिजाब में थीं) मंच पर पहुंचीं, तो नीतीश कुमार ने पहले उन्हें नियुक्ति पत्र दिया। इसके बाद उन्होंने हिजाब की तरफ संकेत करते हुए पूछा - "ये क्या है जी?" डॉक्टर के जवाब देने पर कि "हिजाब है सर", मुख्यमंत्री ने खुद आगे बढ़कर उनका हिजाब खींच दिया। इस दौरान डॉक्टर स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं, कुछ उपस्थित लोग हंसे, और डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। यह पूरा प्रसंग वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

अगले दिन 16 दिसंबर को डॉ. नुसरत परवीन बिहार छोड़कर कोलकाता में अपने परिवार के पास चली गईं। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्होंने बताया कि इस घटना से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हिजाब उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है, जिसे पहनकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने यह सरकारी नौकरी जॉइन न करने का निर्णय लिया। उनके भाई ने भी पुष्टि की कि वे अब इस पद को स्वीकार नहीं करना चाहतीं। विपक्षी दलों ने इस घटना की तीखी आलोचना की। RJD और कांग्रेस ने इसे "निंदनीय" और महिला गरिमा का उल्लंघन बताया। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की भी मांग रखी, जबकि RJD ने उनकी मानसिक दशा पर प्रश्न खड़े किए।

JDU के अल्पसंख्यक मंत्री जमा खान ने सफाई देते हुए कहा कि नीतीश कुमार का इरादा नकारात्मक नहीं था - वे "पितृवत स्नेह" दर्शा रहे थे और एक सफल मुस्लिम महिला का चेहरा सबके सामने लाना चाहते थे। जम्मू-कश्मीर की पार्टियों (PDP, NC) ने भी इस कृत्य की निंदा की, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आईं। कई स्थानों पर FIR दर्ज करने की मांग उठी। विवाद बढ़ने के बाद नीतीश कुमार के कार्यक्रमों में मीडिया की एंट्री प्रतिबंधित कर दी गई।

यह मसला धार्मिक अधिकार, महिला सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा बड़ा विवाद बन चुका है। प्रमुख न्यूज़ चैनल और अखबार (NDTV, दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज़18) ने इसे व्यापक कवरेज दी है, और अधिकांश इसे मुख्यमंत्री की ओर से की गई गलती मान रहे हैं, हालांकि उनकी पार्टी उनका पक्ष ले रही है।