नेपाल: मानवीयता सीखते विद्यार्थी, रसुवा बाढ़ पीड़ितों के लिए भाथा और बेलवा से सहयोग
स्टेट डेस्क, संजय दास थारू।
वीरगंज: पर्सा जिले के पटेर्वा सुगौली गाउँपालिका के भाथा और बेलवा क्षेत्र के दो विद्यालयों के विद्यार्थियों ने रसुवा बाढ़ पीड़ितों के लिए सहयोग राशि जुटाई है। आपदा की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों का साथ देने के उद्देश्य से विद्यार्थियों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग एकत्र किया।
रसुवा में आई बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति हुई है। ऐसे समय में देश के विभिन्न स्थानों से पीड़ितों के लिए सहयोग जुटाया जा रहा है। इसी क्रम में पटेर्वा सुगौली के विद्यार्थियों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग कर आपदा प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता दिखाई है।
विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने सहयोग जुटाने में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास से एकत्र की गई सहयोग राशि संबंधित अभियान को उपलब्ध कराई, ताकि इसे पीड़ित परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
विद्यार्थियों की यह पहल केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानवीय संवेदना का भी उदाहरण बनी है। उनकी इस पहल ने संदेश दिया है कि विपदा और संकट के समय समाज के हर वर्ग को अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।
विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी, सहयोग, सहकार्य और मानवीयता की भावना भी सिखाना जरूरी है। विद्यार्थी जीवन से ही समाज में आने वाली समस्याओं और आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाने में ऐसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विद्यार्थियों के सहयोग से यह भावना भी सामने आई है कि वे आपदा के कारण समस्याओं से जूझ रहे परिवारों के प्रति चिंतित हैं और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी मदद के लिए तैयार हैं। उनकी इस पहल से स्थानीय समुदाय में भी सकारात्मक संदेश गया है।
भाथा और बेलवा के दो विद्यालयों से शुरू हुई यह मानवीय पहल विद्यार्थियों में सामाजिक सेवा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ आपदा के समय एक-दूसरे की मदद करने की भावना को मजबूत करने में सहायक होगी।
स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों द्वारा किए गए इस सहयोग को सराहनीय माना जा रहा है। संकट के समय सहयोग की भावना राशि से अधिक महत्वपूर्ण होती है। विद्यार्थियों के इस छोटे से प्रयास ने समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
आपदा किसी एक व्यक्ति, परिवार या समुदाय की समस्या नहीं, बल्कि सामूहिक चुनौती होती है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना चाहिए। विद्यार्थियों के इस छोटे से प्रयास से पीड़ित परिवारों को राहत के साथ यह मनोबल भी मिल सकता है कि वे इस कठिन समय में अकेले नहीं हैं।







