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नेपाल में आंदोलन शांत, बीरगंज के बाजारों में लौटी रौनक

विदेश डेस्क, एन.के. सिंह |

निजी विद्यालय संगठन ने जेनजी आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और शिक्षा तुरंत शुरू करने की अपील की।

बीरगंज: नेपाल में पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री के पदभार संभालने, संसद के विघटन और हाल ही में जेनजी आंदोलन के दौरान लगाए गए कर्फ्यू में ढील के बाद, वीरगंज सहित पूरे देश में जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। बाजारों में रौनक फिर से लौट आई है और दैनिक गतिविधियां सामान्य हो रही हैं।

सड़कों पर फिर से लोगों की चहल-पहल दिखाई दे रही है। नाश्ते-पानी के ठेले और छोटी दुकानें खुल गई हैं। कपड़े की दुकानों, हार्डवेयर स्टोर्स, किराना दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खुलने से शहर की अर्थव्यवस्था भी गति पकड़ रही है। स्थानीय लोगों ने लंबे समय बाद सामान्य स्थिति बहाल होने पर राहत जताई है। जेनजी आंदोलन के दौरान पुलिस से छीने गए हथियारों को भी कुछ जगहों पर सेना को वापस कर दिया गया है।

निजी स्कूल संगठन ने की शिक्षा तत्काल शुरू करने की अपील

इस बीच, निजी एवं आवासीय विद्यालय संगठन नेपाल (प्यासन) ने जेनजी आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शिक्षा क्षेत्र को तुरंत सुचारु करने की अपील की है। संगठन ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि इस आंदोलन ने देश की राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक चेतना में एक ऐतिहासिक बदलाव लाया है।
संगठन ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के पदभार संभालने का स्वागत किया और नई सरकार से भ्रष्टाचार मुक्त शासन, सामाजिक न्याय और समावेशी समृद्धि की दिशा में काम करने की उम्मीद जताई।

संगठन के जिला अध्यक्ष सरोज प्रसाद चौधरी और सचिव अशोक संग्रौला द्वारा जारी विज्ञप्ति में शिक्षा को राष्ट्र के पुनर्निर्माण की रीढ़ बताया गया है। उन्होंने सरकार से शिक्षा में निवेश बढ़ाने, आधारभूत संरचना में सुधार करने और रोजगार सृजन पर गंभीरता से ध्यान देने का आग्रह किया।

विज्ञप्ति में विशेष रूप से पर्सा जिले में पिछले पाँच महीनों से शिक्षा क्षेत्र के अस्त-व्यस्त होने का उल्लेख किया गया। भीषण गर्मी, पानी की कमी, हैजा महामारी और हाल के जेनजी आंदोलन ने शैक्षिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

संगठन ने कहा, "इस स्थिति को और अधिक समय तक जारी रखना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।" इसलिए, उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों, नागरिक समाज और बुद्धिजीवियों सहित सभी से शैक्षिक गतिविधियों को तुरंत फिर से शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया है।