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पटना में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का भंडाफोड़, एक्सपायरी डेट बदलकर सप्लाई

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

पटना। राजधानी में सरकारी अस्पतालों के लिए आने वाली मुफ्त दवाओं की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का खुलासा हुआ है। अगमकुआं थाना क्षेत्र के भागवत नगर स्थित जनता नगर में औषधि नियंत्रण प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में करीब 40 लाख रुपये की दवाएं और इंजेक्शन जब्त किए गए।

कार्रवाई के दौरान एक आरोपी जयंत कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी नीरज कुमार, कुंदन कुमार और मकान मालिक अजय कुमार फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया है।

छापेमारी में गोदाम से 38 कार्टन में भारी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि गिरोह सरकारी अस्पतालों से कम कीमत पर दवाएं हासिल कर उन्हें गोदाम में इकट्ठा करता था और बाद में “सरकारी आपूर्ति” का लेबल हटाकर निजी कंपनियों के रैपर लगाकर बाजार में बेचता था।

इसके अलावा, एक्सपायर हो चुकी दवाओं की तारीख बदलकर उन्हें दोबारा बाजार में उतारा जा रहा था। इन दवाओं की सप्लाई राजधानी समेत राज्य के विभिन्न मेडिकल दुकानों तक की जा रही थी। इस अवैध नेटवर्क में एक दर्जन से अधिक लोगों की संलिप्तता की आशंका है।

जब्त दवाओं में कई जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल हैं, जिनका उपयोग गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इनमें एल्बुमिन, कोडिन, प्राजोसिन, बुप्रेनार्फिन, एंटी-रेबीज इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स, सेफिक्साइम, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलनेट, सेफ्ट्रिएक्सोन, मेरोपेनेम और एरिथ्रोपोइटिन जैसे इंजेक्शन शामिल हैं।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और बिचौलियों के जरिए सरकारी दवाओं को खुले बाजार में खपाया जा रहा था। इस तरह की गतिविधियों से मरीजों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था।

यह कार्रवाई सहायक औषधि नियंत्रक चुनेंद्र महतो के निर्देशन में की गई, जबकि ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार और अंसारी ने इसका नेतृत्व किया। फिलहाल गोदाम को सील कर दिया गया है और जब्त दवाओं की जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था सुरक्षित और पारदर्शी बनी रहे।