नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
केंद्र लाया सख्त संशोधन बिल, संगठित गिरोहों पर 10 करोड़ तक जुर्माना
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए 2024 के कानून को और सख्त बनाने वाला संशोधन विधेयक तैयार कर लिया है। लोकसभा सदस्यों के बीच शनिवार को वितरित इस बिल को सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 में सजा और जुर्माने दोनों को बढ़ाया गया है। साथ ही जांच और मुकदमे की समय-सीमा भी तय की गई है, ताकि मामलों में देरी न हो।
सजा और जुर्माने में भारी बढ़ोतरी
सामान्य अपराधों में पहले तीन से पांच साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना था। अब इसे पांच से 10 साल जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने तक बढ़ाया गया है।
सेवा प्रदाताओं पर जुर्माना एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है। उनके निदेशकों और प्रबंधन पर भी तीन से 10 साल जेल के साथ पांच करोड़ रुपये तक जुर्माना लगेगा। प्रभारी कर्मियों के लिए सजा पांच से 10 साल जेल और पांच करोड़ रुपये जुर्माने तक बढ़ाई गई है।
संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल कर दी गई है। जुर्माना एक करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
जांच और मुकदमे की सख्त समय-सीमा
बिल में जांच पूरी करने की अधिकतम समय-सीमा 60 दिन तय की गई है। चाहे जांच स्थानीय पुलिस करे, केंद्रीय एजेंसी या विशेष टास्क फोर्स, दो महीने में रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
केंद्र सरकार को विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है, जो सिर्फ इन मामलों की जांच संभालेगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सेशन्स कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषित करना होगा। मुकदमे रोजाना चलेंगे और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के अंदर पूरा करना अनिवार्य होगा।
अदालतें अगले दिन से आगे का स्थगन बिना लिखित असाधारण कारण के नहीं दे सकेंगी। 2024 के कानून के तहत चल रहे सभी मामले भी इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाएंगे और तीन महीने में निपटाने होंगे।
अपील और अभियोजन के नियम
जमानत, फैसले या सजा के खिलाफ अपील 30 दिन के अंदर करनी होगी। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 90 दिन की छूट मिलेगी। हाईकोर्ट में दो जजों की डिवीजन बेंच इन अपीलों की सुनवाई करेगी और तीन महीने में फैसला सुनाएगी।राज्यों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने होंगे, जो सिर्फ इन मामलों को संभालेंगे।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाना है। संशोधन से समयबद्ध जांच, तेज मुकदमे और संगठित गिरोहों के खिलाफ मजबूत रोकथाम सुनिश्चित होगी। हाल के पेपर लीक और धांधली के मामलों ने परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत पैदा की है। नया विधेयक इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए लाया गया है।







