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पश्चिम एशिया संकट से भारत के आर्थिक विकास पर जोखिम: आरबीआई

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 जारी करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण देश के आर्थिक विकास की गति और महंगाई पर निकट भविष्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से इस संकट की वजह से कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में आने वाला उछाल भारतीय बाजारों के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। इसके साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लगातार जारी व्यवधान और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। आरबीआई ने आगाह किया है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो इससे घरेलू कॉरपोरेट जगत की आय प्रभावित हो सकती है और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) के प्रदर्शन के सामने भी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इन बाहरी दबावों के अलावा वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता और मौसम संबंधी प्रतिकूल बदलाव भी विकास दर और मुद्रास्फीति को प्रभावित करने वाले नकारात्मक कारकों में शामिल हैं।  

इन तमाम अल्पकालिक वैश्विक चुनौतियों और जोखिमों के बावजूद, रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि भारत के आर्थिक विकास की संभावनाएं अब भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई हैं। भारतीय बैंकिंग प्रणाली बेहद मजबूत स्थिति में है और इसके आगे भी इसी मजबूती के साथ काम करने की पूरी उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू अर्थव्यवस्था में निवेश और विकास की निरंतरता को बनाए रखने के लिए कई मजबूत स्तंभ मौजूद हैं। कॉरपोरेट क्षेत्र और वाणिज्यिक बैंकों की बैलेंस शीट वर्तमान में काफी सुदृढ़ है, जो किसी भी बाहरी झटके को झेलने में सक्षम है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के निर्माण और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर लगातार दिया जा रहा जोर देश में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार दे रहा है।

वैश्विक स्तर पर प्रमुख साझेदार देशों के साथ किए गए नए व्यापार समझौतों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से भी भारत के निर्यात, विदेशी निवेश और व्यापारिक अवसरों को काफी बल मिल रहा है। संक्षेप में, हालांकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर कुछ समय के लिए जोखिम जरूर बढ़े हैं, लेकिन देश के मजबूत व्यापक आर्थिक आधार (Macroeconomic Fundamentals) के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था इस संकट के बीच भी अपनी मजबूत स्थिति और विकास की गति को बरकरार रखने में पूरी तरह सक्षम दिखाई देती है।