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पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में शामिल होने की संभावना सिरे से खारिज की

विदेश डेस्क, ऋषि राज।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अमेरिका समर्थित ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनका देश इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की किसी भी योजना का हिस्सा नहीं है और फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में चल रही कूटनीतिक गतिविधियों और अमेरिका की कोशिशों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि पाकिस्तान भी भविष्य में अब्राहम समझौते का हिस्सा बन सकता है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन खबरों को निराधार बताते हुए कहा कि देश की विदेश नीति फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों और स्वतंत्र राष्ट्र की मांग के समर्थन पर आधारित है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि जब तक फिलिस्तीनियों को न्याय और स्वतंत्र राज्य का अधिकार नहीं मिलता, तब तक इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

गौरतलब है कि अब्राहम समझौता वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में शुरू हुआ था, जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और कुछ अन्य देशों ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। इसके बाद अमेरिका लगातार मुस्लिम देशों को इस समझौते से जोड़ने की कोशिश करता रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की घरेलू राजनीति, धार्मिक भावनाएं और फिलिस्तीन मुद्दे पर जनता का मजबूत समर्थन सरकार के लिए इस विषय को बेहद संवेदनशील बनाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ रखते हुए किसी भी संभावित समझौते की अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान पश्चिम एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच अपनी पारंपरिक नीति को दोहराने की कोशिश है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि पाकिस्तान फिलहाल इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाने जा रहा है।