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पाकिस्तान में बलोच विद्रोहियों पर प्रहार: 48 घंटों में 177 ढेर

विदेश डेस्क, मुस्कान कुमारी।

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिण-पश्चिम इलाके में रात भर चले छापों में दो दर्जन विद्रोहियों को मार गिराया, जिससे पिछले 48 घंटों में मारे गए मिलिटेंट्स की संख्या 177 पहुंच गई। यह कार्रवाई हाल के समन्वित हमलों के बाद की गई, जिनमें ज्यादातर नागरिकों समेत कम से कम 33 लोग मारे गए।

पुलिस और सेना की संयुक्त टीमों ने शनिवार तड़के से ही प्रतिबंधित बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के सदस्यों के खिलाफ कई इलाकों में अभियान चलाया। लगभग 200 विद्रोही छोटे-छोटे समूहों में पुलिस स्टेशनों, नागरिकों के घरों और सुरक्षा सुविधाओं पर आत्मघाती बम विस्फोटों और बंदूक हमलों से हमला बोल चुके थे। अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में 18 नागरिक और 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए, जिसने पूरे पाकिस्तान में राजनीतिक नेताओं से व्यापक निंदा बटोरी।

दशकों का सबसे बड़ा नुकसान

विश्लेषकों का कहना है कि विद्रोहियों को पिछले 48 घंटों में हुआ यह नुकसान दशकों में सबसे ज्यादा है। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने सोमवार को एक बयान में सुरक्षा बलों की सराहना की और मारे गए विद्रोहियों को "भारत समर्थित आतंकवादी" बताया। हालांकि, इस दावे के लिए कोई सबूत नहीं दिया गया और नई दिल्ली की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

प्रांत के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने पहले कहा था कि सुरक्षा बलों ने हमलों के बाद तेजी से जवाबी कार्रवाई की, जिसमें 145 विद्रोही पहले ही मारे जा चुके थे। सोमवार को 22 और विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि की गई। अधिकारियों के मुताबिक, बीएलए ने हमलों की जिम्मेदारी ली है, जो प्रांत में सुरक्षा बलों, चीनी हितों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अक्सर निशाना बनाते रहे हैं।

प्रांत में अशांति की जड़ें

पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान आबादी में सबसे कम है, लेकिन ऊंचे पहाड़ों से भरा यह इलाका जातीय बलूच अल्पसंख्यकों का गढ़ है। ये अल्पसंख्यक केंद्र सरकार पर भेदभाव और शोषण का आरोप लगाते हैं, जिसने अलगाववादी विद्रोह को जन्म दिया है। यहां इस्लामी चरमपंथी भी सक्रिय हैं।

सोमवार को अधिकारियों ने दावा किया कि प्रांत में काफी हद तक सामान्य स्थिति बहाल हो गई है, लेकिन बलूचिस्तान और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल सेवा तीसरे दिन भी निलंबित रही। हमलों के बाद सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर सेवाएं रोक दी गईं थीं।

पहले के हमलों का सिलसिला

मार्च में बीएलए विद्रोहियों ने बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला किया था, जिसमें 31 लोग मारे गए थे। सैकड़ों यात्रियों को बंधक बनाया गया, लेकिन सुरक्षा बलों की बचाव कार्रवाई में सभी 33 हमलावर मारे गए और यात्री मुक्त हो गए। अधिकारियों का कहना है कि बीएलए पाकिस्तानी तालिबान के साथ मिलकर काम करता है, जो अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से जुड़ा है।