नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
2024-25 में करीब 480 करोड़ मिले, खर्च सिर्फ 87.85 लाख; बैलेंस 8452 करोड़ पहुंचा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) को वित्तीय वर्ष 2024-25 में दान में करीब 480 करोड़ रुपये मिले। यह पिछले वर्ष की तुलना में 592 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। हालांकि फंड ने उसी साल कुल आय का महज 0.1 प्रतिशत ही खर्च किया।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार घरेलू दान 30 प्रतिशत घटकर करीब 479 करोड़ रुपये रह गए। विदेशी दान भी 18 प्रतिशत घटकर 92.8 लाख रुपये रह गए। कुल आय (दान, बैंक ब्याज और एजेंसियों से वापसी समेत) 1279.9 करोड़ रुपये रही। इसमें से खर्च सिर्फ 87.85 लाख रुपये यानी 0.1 प्रतिशत हुआ।
बैलेंस बढ़ा, खर्च घटा
31 मार्च 2025 को फंड का क्लोजिंग बैलेंस 8452.06 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 17.8 प्रतिशत अधिक है। कम खर्च के कारण बैलेंस लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2020 में शुरू होने से लेकर 31 मार्च 2025 तक फंड ने कुल प्राप्त आय का 18.7 प्रतिशत से भी कम खर्च किया है।
पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा कि उपलब्ध 8452 करोड़ में से सिर्फ 0.01 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी रकम को बेकार क्यों रखा जा रहा है। रिपोर्ट में 324 करोड़ रुपये एजेंसियों से वापस आए बताए गए हैं, लेकिन इनके बारे में कोई विस्तार नहीं दिया गया कि किस एजेंसी ने लौटाए और क्यों।
ऑडिट रिपोर्ट देरी से आई
फंड की ऑडिट रिपोर्ट 2022-23 के बाद सार्वजनिक नहीं की गई थी। मंगलवार को 2023-24 और 2024-25 की रिपोर्ट एक साथ जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि खर्च का बड़ा हिस्सा पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम पर गया।
पीएम केयर्स फंड मार्च 2020 में सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में बनाया गया था। इसका मकसद स्वास्थ्य आपात और आपदाओं में राहत देना है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं और केंद्रीय मंत्री ट्रस्टी। फंड पूरी तरह स्वैच्छिक योगदान से चलता है।
पारदर्शिता पर सवाल
कार्यकर्ताओं का कहना है कि फंड आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया है। संसद की जांच और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के ऑडिट से भी यह मुक्त है। कई सार्वजनिक उपक्रमों ने सीएसआर के तहत योगदान दिया। सरकारी कर्मचारियों ने वेतन से भी योगदान किया। फिर भी फंड को सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जाता।
अंजलि भारद्वाज ने कहा कि आपदा के समय नागरिकों की मदद के लिए बनाए गए इस फंड में हजारों करोड़ जमा हो गए हैं। विदेशी स्रोत भी शामिल हैं। फिर भी यह गोपनीयता की चादर में लिपटा हुआ है। फंड के स्रोत और खर्च के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट में ब्याज आय का भी जिक्र है। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज दान के करीब पहुंच गया। करीब 93 प्रतिशत रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है।
फंड की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी। शुरुआती वर्षों में ऑक्सीजन प्लांट, वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं पर भारी खर्च हुआ था। अब खर्च बहुत कम हो गया है। बैलेंस बढ़ते जाने से सवाल उठ रहे हैं कि आपात स्थितियों के लिए जमा रकम का इस्तेमाल कैसे हो रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट जारी होने के बाद कार्यकर्ताओं ने फिर पारदर्शिता की मांग दोहराई है। वे चाहते हैं कि खर्च का पूरा ब्योरा, वापसी का कारण और स्रोतों का खुलासा हो।







