नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह।
नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशी धरती पर एक सवाल के दौरान प्रधानमंत्री जिस तरह जवाब देने से बचते नजर आए, उसने लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया ने यह पूरा घटनाक्रम देखा और इससे लोकतंत्र में संवाद की परंपरा पर चर्चा तेज हो गई है।
जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री का मीडिया के सामान्य सवालों का सामना करने में असहज दिखाई देना स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक संकेत नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री मीडिया के सीधे सवालों से दूरी बनाए हुए हैं, जिससे संवाद और जवाबदेही की लोकतांत्रिक संस्कृति कमजोर हो रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में हमेशा से मीडिया, विपक्ष और सरकार के बीच सवाल-जवाब की मजबूत परंपरा रही है। पूर्व प्रधानमंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया है, लेकिन बीते एक दशक में यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जनता और मीडिया के प्रति जवाबदेही भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। सरकार को हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए और सवालों का जवाब देना चाहिए।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और उसकी भूमिका केवल खबर दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार से जवाब मांगना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और संवाद की परंपरा जितनी मजबूत होगी, जनता का भरोसा भी उतना ही बढ़ेगा।
हालांकि, भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
देश की राजनीति में मीडिया संवाद और जवाबदेही का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा उठाए गए इस सवाल ने एक बार फिर लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक संवाद को लेकर नई बहस छेड़ दी है।







