स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने जापान ओपन सुपर 750 के महिला एकल वर्ग का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। रविवार, 19 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले में सिंधु ने मेजबान जापान की स्टार शटलर अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से हराया। 50 मिनट तक चले इस मुकाबले में सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम की।
इस जीत के साथ पीवी सिंधु जापान ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले इस टूर्नामेंट के किसी भी वर्ग में कोई भारतीय खिलाड़ी चैंपियन नहीं बन सका था। पहली बार किसी भारतीय ने यहां फाइनल में जगह बनाई और उसी अभियान को खिताबी जीत के साथ पूरा करते हुए भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
यह सफलता सिंधु के लिए इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि उन्होंने 19 महीने बाद BWF वर्ल्ड टूर का कोई खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल का खिताब जीता था। लंबे समय से फिटनेस और फॉर्म की चुनौतियों का सामना कर रहीं सिंधु ने इस जीत के साथ दमदार वापसी का संकेत दिया है।
यह उनके करियर का पहला BWF सुपर 750 सीरीज खिताब भी है। साथ ही, 2019 में विश्व चैंपियन बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब है। सिंधु और अकाने यामागुची के बीच यह कुल 30वीं भिड़ंत थी। दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों में सिंधु ने 16 जबकि यामागुची ने 14 जीत दर्ज की हैं।
इस वर्ष मलेशिया में दोनों खिलाड़ियों की पिछली भिड़ंत पूरी नहीं हो सकी थी। पहला गेम हारने के बाद अकाने यामागुची चोट के कारण मुकाबले से हट गई थीं। हालांकि, उससे पहले दोनों के बीच खेले गए 10 मुकाबलों में से सात में जीत जापानी खिलाड़ी के नाम रही थी। ऐसे में जापान ओपन के फाइनल में मिली यह जीत सिंधु के लिए सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ दमदार जवाब भी साबित हुई।
फाइनल से पहले सेमीफाइनल में पीवी सिंधु ने ओलंपिक चैंपियन चीन की चेन युफेई को 21-19, 15-10 से हराया था। हालांकि, हैमस्ट्रिंग चोट के कारण युफेई यह मुकाबला पूरा नहीं खेल सकीं। पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में नजर आईं सिंधु ने फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए जापान ओपन सुपर 750 का ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया।







