स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
बक्सर: पटना–बक्सर फोरलेन पर सड़क हादसों के शिकार लोगों के लिए डुमरांव के प्रतापसागर गांव निवासी कृष्णा शर्मा आज किसी देवदूत से कम नहीं हैं। अब तक वे 973 से अधिक घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचा चुके हैं। खास बात यह है कि बीते एक साल में ही उन्होंने 262 घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाई है।
कृष्णा शर्मा दुर्घटना की सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के अपनी एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंच जाते हैं। कई बार हालात ऐसे होते हैं कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे घायल को अस्पताल पहुंचा देते हैं। शुरुआत में वे भी आम लोगों की तरह कानूनी झंझट और पूछताछ के डर से ऐसे मामलों से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन एक घायल को सड़क पर तड़पता देखकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया।
इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि भय या औपचारिकताएं किसी की जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकतीं। तभी से वे अपनी निजी एंबुलेंस से घायलों को निःशुल्क अस्पताल पहुंचाने लगे। गंभीर मामलों में वे बक्सर से पटना और वाराणसी तक मरीजों को ले जाकर इलाज सुनिश्चित करा चुके हैं।
कृष्णा शर्मा का समाज सेवा से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद वे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। पिता बसंत शर्मा और मां फूल कुमारी देवी ने उनमें इंसानियत और सेवा का भाव बचपन से ही भर दिया था।
करीब सात साल पहले एक सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने का अनुभव उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया। उस दिन उन्होंने महसूस किया कि समय पर मदद मिल जाए तो मौत को भी हराया जा सकता है। इसके बाद 2018 में मां को दिल का दौरा पड़ने पर समय पर एंबुलेंस न मिल पाने का दर्द उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया।
मां की मौत के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि आगे किसी को एंबुलेंस के अभाव में जान न गंवानी पड़े। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद एंबुलेंस खरीदी और निस्वार्थ सेवा में जुट गए। कृष्णा शर्मा का कहना है कि दूसरों की जान बचाने से मिलने वाला सुकून ही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई है।







