Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

बिना हिजाब प्रस्तुति पर ईरानी गायिका को सजा

विदेश डेस्क, श्रेयांश पराशर l

तेहरान। ईरान में हिजाब नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब सार्वजनिक प्रस्तुति देने के मामले में अदालत ने 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले ने देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

जानकारी के अनुसार, 29 वर्षीय गायिका परस्तू अहमदी ने वर्ष 2024 में अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम किए गए एक संगीत कार्यक्रम में बिना हिजाब प्रस्तुति दी थी। इस कार्यक्रम में उनके साथ एक प्रोडक्शन टीम और कई संगीतकार भी शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध देशभक्ति गीत ‘अज़ खून-ए जवांन-ए वतन’ प्रस्तुत किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की नैतिक पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने इस प्रस्तुति को देश के धार्मिक और सामाजिक नियमों का उल्लंघन माना। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई। कोम प्रांत की एक अदालत ने अहमदी समेत कार्यक्रम से जुड़े अन्य कलाकारों और सहयोगियों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए विभिन्न दंड निर्धारित किए।

मानवाधिकार संगठनों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस सजा की आलोचना की है। उनका कहना है कि कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति और रचनात्मक कार्यों के लिए दंडित करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं, ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि देश के कानून और सांस्कृतिक मूल्यों का पालन सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और धार्मिक नियमों के बीच चल रहे लंबे विवाद को फिर से उजागर करता है। इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।