स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
पटना: मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पहले चरण में राज्य के 11 जिला अस्पतालों और 180 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सके।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसके लिए चयनित जिला अस्पतालों और सीएचसी के प्रसूति शल्य कक्षों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किए जाने वाले जिला अस्पतालों में बेगूसराय, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, सिवान, सीतामढ़ी, वैशाली, अररिया, बांका, मुजफ्फरपुर, नालंदा और सहरसा शामिल हैं। इसके अलावा राज्यभर में कुल 180 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी चिह्नित किया गया है, जिससे ग्रामीण मरीजों को उनके क्षेत्र में ही बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
इन केंद्रों पर इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के अनुरूप 36 प्रकार के आधुनिक और हाई-टेक चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है कि वे चिह्नित केंद्रों का निरीक्षण कर उपकरणों की उपलब्धता और आवश्यकताओं का आकलन करें।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आपात स्थितियों से निपटने के लिए इन केंद्रों पर एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और डिफिब्रिलेटर की अनिवार्य व्यवस्था की जाएगी। इस पहल से बड़े अस्पतालों पर दबाव कम होगा और बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में दीर्घकालिक एवं ऐतिहासिक सुधार देखने को मिलेगा।







