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बिहार के सबसे बड़े निजी पावर प्रोजेक्ट का जायजा लेने पीरपैंती पहुंचे गौतम अदाणी

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।

पटना/भागलपुर । देश के प्रमुख उद्योगपति और अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी झारखंड और बिहार का दौरा किया। अपने इस दौरे की शुरुआत उन्होंने झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना से की। इसके बाद वे बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती पहुंचे जहां निर्माणाधीन थर्मल पावर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इसके बाद वे झारखंड के गोड्डा भी गए और वहां संचालित पावर प्लांट का जायजा लिया।

गौतम अदाणी का यह दौरा बिहार और झारखंड में औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदाणी समूह बिहार के पीरपैंती प्रखंड में 27,000 करोड़ की लागत से 2400 मेगावाट क्षमता का अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रहा है। इसे पिछले कई दशकों में बिहार में किसी भी औद्योगिक समूह द्वारा किया जा रहा सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है।

यह मेगा प्रोजेक्ट पीरपैंती प्रखंड के सिरमतपुर और आसपास की लगभग 479 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इस स्थान की खास बात इसकी मजबूत लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी है। प्रोजेक्ट के उत्तर में गंगा नदी, दक्षिण में नेशनल हाईवे और पास में पीरपैंती रेलवे स्टेशन स्थित है जिससे निर्माण और संचालन में सुविधा होगी।

इस परियोजना पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इसे पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल यहां चहारदीवारी बनाने और जमीन समतल करने का काम चल रहा है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद है। निर्माण के दौरान 10 से 12 हजार लोगों को काम मिलेगा, जबकि प्लांट शुरू होने के बाद करीब 3000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से बिहार की बिजली क्षमता मजबूत होगी और आसपास के इलाके में उद्योग, आधारभूत ढांचे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान गौतम अदाणी ने पीरपैंती में वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इसके बाद वे गोड्डा पावर प्लांट पहुंचे, जहां कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों से मुलाकात की और वहां भी पौधारोपण किया। गौतम अदाणी का यह दौरा केवल परियोजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बिहार और झारखंड में निवेश, विकास और भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी दिया।