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बिहार चुनाव में JMM की एंट्री: गठबंधन से उपेक्षा पर नाराज हेमंत सोरेन, 12 सीटों पर फोकस

रांची/पटना, नीतीश कुमार |
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अब बिहार विधानसभा चुनाव में अपने दम पर उतरने की तैयारी में है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि INDIA गठबंधन में उसे समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो वह सीमावर्ती आदिवासी इलाकों की 12 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी पहले ही इन क्षेत्रों में रणनीतिक बैठकों और स्थानीय स्तर पर संगठित तैयारियों की शुरुआत कर चुकी है।

JMM को उम्मीद थी कि बिहार में वह INDIA गठबंधन का हिस्सा बनेगी, विशेषकर तब जब झारखंड में कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर गठबंधन सरकार चला रही है। वर्ष 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव में JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 56 सीटें जीती थीं, जिसमें से 34 सीटें खुद JMM ने हासिल की थीं। इसके बावजूद पटना में हुई महागठबंधन की हालिया चार बैठकों में JMM को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई है।

JMM के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा, “हमारी अपनी तैयारी है और हम अपने बलबूते चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।” पार्टी ने झारखंड से सटी बिहार की 12 सीटों की पहचान की है, जिनमें आदिवासी आबादी प्रभावी मानी जाती है। JMM का मानना है कि झारखंड में चलाई जा रही योजनाएं जैसे मंइयां सम्मान योजना इन क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं।

इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने 13 जून को शिष्टाचार मुलाकात की। इस भेंट की तस्वीर मुख्यमंत्री कार्यालय के एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से साझा की गई। हालाँकि यह मुलाकात औपचारिक बताई गई, लेकिन इसे महागठबंधन की एक दिन पहले हुई बैठक के संदर्भ में सियासी नजरिए से भी देखा जा रहा है। इस बैठक में JMM को निमंत्रण नहीं दिया गया था।

JMM द्वारा महागठबंधन की बैठक पर सवाल उठाने और अपनी उपेक्षा जताने से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी ने RJD को राजनीतिक संदेश देने का काम किया है। यह स्थिति आने वाले समय में बिहार की क्षेत्रीय राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। जहां एक ओर JMM के अलग चुनाव लड़ने से INDIA गठबंधन के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर JMM के लिए यह बिहार में राजनीतिक विस्तार का अवसर भी हो सकता है।