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बिहार चुनाव में परिवारवाद का दबदबा

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

बिहार चुनाव में परिवारवाद का प्रभाव साफ दिखा। नामी नेताओं ने बेटा, बेटी, बहू, दामाद से लेकर पति-पत्नी और समधन तक चुनावी मुकाबले में उतारा। इस बार बिहार चुनाव में परिवारवाद जमकर दिखा। सभी दलों के बड़े नेताओं के बेटे-बेटी, बहू-दामाद, पत्नी, समधन और रिश्तेदार मैदान में उतरे। कई प्रत्याशी जीते, तो कुछ हार का सामना करना पड़ा। परिवारवाद के मामले में कोई दल पीछे नहीं रहा चाहे एनडीए हो या महागठबंधन। सबसे ज्यादा जीत जीतनराम मांझी के परिजनों ने दर्ज की। उनकी बहू, समधन और दामाद तीनों विजयी रहे।

इमामगंज से मांझी की बहू दीपा मांझी जीतीं, बाराचट्टी से समधन ज्योति देवी विजयी रहीं और सिकंदरा से दामाद प्रफुल्ल कुमार 23,000 से अधिक वोटों से जीते। रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेह लता ने सासाराम से जीत हासिल की। जदयू की ओर से पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने नबीनगर से जीत दर्ज की। उनकी मां लवली आनंद शिवहर से जदयू सांसद हैं।

घोसी से पूर्व सांसद अरुण कुमार के पुत्र ऋतुराज 11,929 वोटों से जीते। पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी ने नवादा से जीत दर्ज की। हरलाखी से पूर्व विधायक बसंत कुशवाहा के बेटे सुधांशु शेखर 36,236 वोटों से विजयी रहे। लौकहा में पूर्व मंत्री हरि शाह के बेटे सतीश शाह ने भी जीत हासिल की।

बीजेपी से गौरा बौड़ाम सीट पर सुजीत सिंह जीते, जबकि उनकी पत्नी स्वर्णा सिंह पहले से विधायक हैं। पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद औराई से 57,206 वोटों से जीतीं। तारापुर से शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी 45,843 वोटों से जीत गए। पांच बार के विधायक अंबिका शरण सिंह के बेटे राघवेंद्र प्रताप सिंह बरहरा से 14,403 वोटों से विजयी रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा झंझारपुर से 50 हजार से अधिक वोटों से जीते। जमुई से श्रेयसी सिंह 54,498 वोटों से विजयी रहीं। उनके पिता दिग्विजय सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। रघुनाथपुर से बाहुबली और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब ने जीत दर्ज की।

आरजेडी के यादव परिवार की बात करें तो लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव राघोपुर से जीत गए। वहीं पार्टी से अलग लड़ रहे बड़े बेटे तेज प्रताप चुनाव हार गए और तीसरे स्थान पर रहे। लालगंज से बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला भी हार गईं। राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद के बेटे आनंद सिंह रामगढ़ से हार गए और तीसरे नंबर पर रहे।

राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी के बेटे राहुल तिवारी शाहपुर से हार गए। परबत्ता से दिवंगत आरएन सिंह के पुत्र डॉ. संजीव सिंह भी हार गए। वे जदयू छोड़कर राजद में आए थे। परिहार से राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता पूर्वे भी चुनाव हार गईं। पूर्व मंत्री तुलसी मेहता के पुत्र आलोक मेहता उजियारपुर से जीते। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह के पुत्र सतीश सिंह राजद से चेरिया बरियारपुर से लड़े, लेकिन हार गए। जदयू के अभिषेक आनंद ने उन्हें 4 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।

इसके अलावा मोकामा की हाई-प्रोफाइल सीट से सूरजभान की पत्नी वीणा देवी हार गईं। जदयू के अनंत सिंह ने जेल से चुनाव जीत लिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ के पुत्र फराज फातमी केवटी से हार गए। चिराग पासवान के भांजे सीमांत गड़खा से हार गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी लता सिंह अस्थावां से हार गईं। वे जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं। कई दिग्गजों के परिजन परिवार की राजनीतिक विरासत बचाने उतरे थे, कई को सफलता मिली, तो कईयों को हार का सामना करना पड़ा।