स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
DM और SP ने भारी फ़ोर्स के साथ वार्डों को खंगाला, चप्पे-चप्पे की तलाशी से जेल में हड़कंप, अपराधियों के 'नेटवर्क' पर प्रहार की तैयारी
पूर्वी चम्पारण: बिहार की सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरीने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में अब 'कानून का राज' चलेगा। उनके कड़े रुख का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। गुरुवार की अहले सुबह जब पूरा मोतिहारी शहर नींद के आगोश में था, तब मोतिहारी केंद्रीय कारागार की सलाखों के पीछे बंद अपराधियों की नींद 'खाकी' के जूतों की धमक से उड़ गई।
आधी रात के बाद बनी रणनीति, तड़के बोल दिया धावा
मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' संदेश को अमली जामा पहनाने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी गोपनीयता के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। जिलाधिकारी
सौरभ जोरवाल और पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात खुद इस 'महा-छापेमारी' का नेतृत्व कर रहे थे। भारी पुलिस बल के साथ जब अफसरों की गाड़ियां जेल परिसर में दाखिल हुईं, तो जेल प्रशासन से लेकर कैदियों तक में हड़कंप मच गया।
"मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश में भयमुक्त वातावरण होगा। अपराधियों और उनके पनाहगाहों पर नकेल कसने के लिए यह अभियान चलाया गया है। यह तो बस शुरुआत है।"
ऑपरेशन 'क्लीन स्वीप': वार्ड से लेकर रसोई तक खंगाली
प्रशासन की मंशा साफ थी—जेल के अंदर से चलने वाले किसी भी संभावित सिंडिकेट को ध्वस्त करना। जांच टीम ने जेल के हर संवेदनशील कोने की तलाशी ली
सघन वार्ड तलाशी: खूंखार अपराधियों के विशेष सेल और वार्डों में एक-एक बिस्तर और सामान को पलटा गया।
अस्पताल और रसोई: शक के दायरे में आने वाली हर जगह, यहाँ तक कि अस्पताल वार्ड और किचन की भी बारीकी से जांच हुई।
सुरक्षा का घेरा: छापेमारी के दौरान जेल के बाहर और भीतर अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाया गया था ताकि कोई सूचना लीक न हो सके।
मनोवैज्ञानिक जीत: अब जेल नहीं रहेगी 'सेफ जोन'
घंटों चली इस मैराथन तलाशी के दौरान हालांकि किसी प्रतिबंधित सामग्री की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे प्रशासन की एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह छापेमारी अपराधियों के मनोबल को तोड़ने और उन्हें यह बताने के लिए काफी थी कि अब 'पुराना ढर्रा' नहीं चलेगा।
'सम्राट युग' का संदेश: सुधर जाओ या जेल जाओ!
बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद इसे एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। मोतिहारी जेल में हुई यह धमक इस बात का संकेत है कि 'सम्राट युग' में अपराधियों के लिए अब रसूख काम नहीं आएगा। आने वाले दिनों में जेल से लेकर सड़क तक पुलिस का शिकंजा और भी कसने वाला है।
अधिकारियों की दो टूक:डीएम और एसपी ने साफ कर दिया है कि ऐसी औचक कार्रवाइयां अब रुकने वाली नहीं हैं। जेल के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने के निर्देश भी मौके पर ही दिए गए।







