स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
- बिहार में 'सुशासन 2.0' का शंखनाद: DGP विनय कुमार, अब पाताल से भी अपराधियों को खींच लाएगी हाईटेक पुलिस
- बदलेगी बिहार की तस्वीर: सिर्फ सायरन नहीं, अब AI के 'डिजिटल चक्रव्यूह' में फंसेंगे अपराधी; लापरवाह पुलिसकर्मियों पर गिरेगी गाज
पटना: बिहार की कानून-व्यवस्था अब एक नए और आधुनिक युग में प्रवेश कर रही है। राज्य की सड़कों पर अब केवल पुलिस की गाड़ियों के सायरन नहीं गूंजेंगे, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक का ऐसा अदृश्य जाल बिछेगा जिससे बच निकलना किसी भी शातिर अपराधी के लिए नामुमकिन होगा। बिहार विधानसभा में गृह मंत्री सम्राट चौधरी की घोषणाओं और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के सख्त तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में अपराधियों के 'अच्छे दिन' अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो चुके हैं।
डिजिटल हंटर: AI और डेटा से होगी अपराधियों की घेराबंदी
गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बिहार पुलिस के कायाकल्प का खाका पेश करते हुए इसे देश के सबसे आधुनिक पुलिस बलों में शुमार करने का संकल्प दोहराया है। सरकार ने पुलिस के मॉडर्नाइजेशन (आधुनिकीकरण) के लिए खजाना खोल दिया है। राज्य के थानों को 'स्मार्ट स्टेशन' में तब्दील किया जा रहा है, जहाँ हर डेटा डिजिटल होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): अब अपराधियों का पीछा सिर्फ जीप से नहीं, बल्कि AI और बिग डेटा एनालिसिस के जरिए होगा। संदिग्धों की पहचान अब चेहरों और उनके पुराने रिकॉर्ड्स के आधार पर सॉफ्टवेयर पलक झपकते ही कर लेंगे।
पूरे राज्य में सीसीटीवी और सर्विलांस का ऐसा तंत्र विकसित किया जा रहा है कि अपराधी की हर हरकत पुलिस के रडार पर होगी।
बिहार पुलिस अब देश की सबसे आधुनिक ताकतों में से एक होगी। हमने तकनीक और संसाधनों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। अब अपराधियों के लिए बिहार में कोई सुरक्षित कोना नहीं बचेगा: सम्राट चौधरी, गृह मंत्री, बिहार
DGP की दोटूक: "पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे"
बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने कार्यभार संभालते ही अपराधियों को खुली चुनौती दे दी है। उनके सख्त लहजे ने महकमे में हलचल पैदा कर दी है। DGP ने स्पष्ट किया कि अपराध करने के बाद चैन की नींद सोने का दौर अब बीत चुका है। अपराध के प्रति सरकार और पुलिस की नीति अब शून्य सहनशीलता की है।
वैज्ञानिक अनुसंधान: पुलिस अब पारंपरिक तरीकों के बजाय फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर देगी, ताकि अदालत में अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
रील बनाने वाले और कामचोर पुलिसकर्मियों की खैर नहीं
इस नई कार्ययोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रडार पर सिर्फ अपराधी नहीं, बल्कि ढिलाई बरतने वाले और वर्दी की मर्यादा भूलने वाले पुलिसकर्मी भी हैं। सस्पेंशन की तलवार: गृह मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता करने वाले या सोशल मीडिया पर 'रील' बनाने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाएगा।
जवाबदेही तय: यदि किसी कांड की जांच (अनुसंधान) में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होगी। जांच प्रक्रिया को इतना पारदर्शी बनाया जा रहा है कि किसी निर्दोष को परेशानी न हो और कोई दोषी बच न सके।
जनता की सहेली, अपराधियों की दुश्मन
'सुशासन 2.0' का मूल मंत्र पुलिस और जनता के बीच की खाई को पाटना है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसी पुलिस व्यवस्था बनाना है जो आम आदमी के लिए 'सच्चा मित्र' और अपराधियों के लिए 'काल' साबित हो। आधुनिक हथियार, हाईटेक सर्विलांस और ईमानदार जांच के दम पर बिहार पुलिस अब अपराधियों के 'समूल नाश' के लिए तैयार है।
यह नया बिहार है, जहाँ तकनीक और साहस मिलकर एक सुरक्षित और भयमुक्त भविष्य की नींव रख रहे हैं। अब देखना यह है कि तकनीक का यह 'चक्रव्यूह' जमीन पर कितना असर दिखाता है।







