लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।
रक्सौल। भारत-नेपाल सीमा से सटे रक्सौल में मादक पदार्थों की तस्करी का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब तस्कर मोबाइल फोन के जरिए ऑर्डर लेकर तय स्थानों पर स्मैक, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की डिलीवरी कर रहे हैं। ऑटो, बाइक और अन्य छोटे वाहनों का इस्तेमाल कर नशे की खेप ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है और बड़े तस्करों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राहक और तस्कर मोबाइल कॉल या मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क करते हैं। सौदा तय होने के बाद दोनों पक्ष एक सुरक्षित स्थान निर्धारित करते हैं, जहां ऑटो, बाइक या अन्य वाहनों के माध्यम से नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर दी जाती है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण तस्कर इस नेटवर्क का लाभ उठाकर अपने कारोबार को संगठित तरीके से संचालित कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (आईसीपी) बाइपास रोड, आश्रम रोड, नगर रोड, कोइरिया टोला नहर पथ, सैनिक रोड, लक्ष्मीपुर, शुक्ल कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड और नदी किनारे के कई इलाके नशा कारोबारियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में सुबह से देर शाम तक संदिग्ध गतिविधियां और युवाओं की आवाजाही देखी जाती है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है।
पुलिस ने हाल के महीनों में इस अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान तेज किया है। नौ जुलाई को आईसीपी बाइपास क्षेत्र में ऑटो से स्मैक की सप्लाई कर रहे एक तस्कर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा पिछले तीन महीनों के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 30 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों को जब्त किया गया है। वहीं, एक दर्जन से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे स्तर के तस्करों तक सीमित नहीं रहेगी। पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन और इसके मुख्य संचालकों तक पहुंचने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है। साथ ही सूचना तंत्र को मजबूत कर लगातार छापेमारी की जा रही है, ताकि इस संगठित तस्करी गिरोह को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर बनी हुई है। पुलिस का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की खेप पकड़ना नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क का खुलासा कर मुख्य तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना है। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है।







