लोकल डेस्क, अश्विनी कुमार।
रक्सौल: बेटियाँ परिवार की मुस्कान, घर की रौनक और समाज की शक्ति होती हैं। वे केवल किसी परिवार की संतान नहीं, बल्कि संस्कार, प्रेम, संवेदना और जिम्मेदारी की सुंदर मिसाल हैं। अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस हमें बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर देता है।
उक्त अपने विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर प्रेस से साझा किया।
बेटियाँ आज जीवन के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत से सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, प्रशासन और सामाजिक सेवा सहित हर क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ यह साबित करती हैं कि अवसर मिलने पर वे किसी से कम नहीं हैं। फिर भी समाज में कहीं-कहीं बेटियों और बेटों के बीच भेदभाव देखने को मिलता है, जो हमारी सोच में बदलाव की आवश्यकता को दर्शाता है।
बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि परिवार की अनमोल धरोहर समझना चाहिए। उनकी इच्छाओं, सपनों और भावनाओं का सम्मान करना हर माता-पिता का कर्तव्य है। उन्हें अच्छी शिक्षा, आत्मनिर्भर बनने का अवसर और अपने फैसले लेने का विश्वास देना चाहिए। केवल बेटी दिवस पर शुभकामनाएँ देने से नहीं, बल्कि प्रतिदिन उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने से वास्तविक बदलाव आएगा।
एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारी बेटी न केवल अपने परिवार का गौरव बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी बेहतर दिशा देती है। इसलिए जरूरी है कि हम बेटियों को समान अवसर दें, उनकी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
बेटियाँ सम्मान की अधिकारी हैं, दया की नहीं। उनका आत्मविश्वास, सुरक्षा और खुशहाल भविष्य ही एक सभ्य, संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान है। अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर हमारा संकल्प होना चाहिए कि हर बेटी को सम्मान, समानता, सुरक्षा और आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले।







