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भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ममता के गढ़ में खिला कमल

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया है जिसने राज्य के पिछले 15 वर्षों के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है और राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। ताजा रुझानों और चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 294 सीटों वाली विधानसभा में लगभग 200 सीटों के करीब पहुंच रही है, जो कि स्वतंत्रता के बाद राज्य में पार्टी के लिए 'अकल्पनीय' माना जा रहा था।  

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC), जो पिछले तीन कार्यकालों से सत्ता पर काबिज थी, इस बार भाजपा की लहर के सामने टिकती नजर नहीं आ रही है। शुरुआती रुझानों में ही भाजपा ने 148 सीटों के बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लिया और दोपहर तक पार्टी 170 से 185 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए थी। यह जीत भाजपा के लिए न केवल राजनीतिक विजय है, बल्कि यह उन क्षेत्रों में भी अपनी पैठ बनाने का प्रमाण है जिन्हें कभी टीएमसी के अभेद्य दुर्ग माना जाता था, जैसे कि कोलकाता और हावड़ा के प्रेसीडेंसी क्षेत्र।  

ममता बनर्जी की पार्टी को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, जहां वे केवल 85 से 100 सीटों के बीच सिमटती दिख रही हैं। हालांकि, ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन उनके कई कद्दावर मंत्री, जिनमें अरूप विश्वास और सुजित बोस शामिल हैं, अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे चल रहे हैं। चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेतृत्व ने स्थिति को "संदेहास्पद" करार दिया है और चुनाव आयोग पर डेटा अपलोड करने में देरी करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में जश्न मनाना शुरू कर दिया है।  

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्ता परिवर्तन ठीक वैसा ही है जैसा तीन दशक पहले वाम मोर्चे के शासन के अंत के समय देखा गया था। इस बार के चुनाव में घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसका असर मतगणना में साफ दिखाई दे रहा है। जहाँ भाजपा इसे राज्य में "अराजकता के अंत" के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए चुनौतीपूर्ण समय बता रहा है। बहरहाल, अंतिम आंकड़ों का इंतजार जारी है, लेकिन वर्तमान रुझान स्पष्ट रूप से पश्चिम बंगाल में "भगवा क्रांति" की पुष्टि कर रहे हैं।