नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास के लिए आपसी सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके तहत ज्ञान, अनुभव, बेहतर तौर-तरीकों और नवाचारों को साझा करने का निर्णय लिया गया।
इन चार क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हुई बैठक में सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने, एकीकृत वन्य अग्नि प्रबंधन, एकीकृत भू-दृश्य आधारित हरितकरण और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के साथ चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान BRICS पर्यावरण कार्य समूह की ओर से तैयार इन चार क्षेत्रों से जुड़े ज्ञान संकलनों का भी अनावरण किया गया।
सतत जीवनशैली पर सफल पहलों को किया शामिल
सतत जीवनशैली से जुड़े संकलन में पर्यावरण शिक्षा, व्यवहार में बदलाव, सामुदायिक भागीदारी, सतत उपभोग और उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और हरित विकास से जुड़ी सदस्य देशों की सफल पहलों को शामिल किया गया है।
भारत की ओर से मिशन LiFE, पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम और संभव अभियान को प्रमुखता दी गई है।
वन्य अग्नि प्रबंधन में तकनीक और स्थानीय ज्ञान पर जोर
वन्य अग्नि प्रबंधन से जुड़े संकलन में समुदाय की अगुवाई में रोकथाम, स्वदेशी ज्ञान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, तकनीक, तैयारी और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
वहीं, भू-दृश्य आधारित हरितकरण के संकलन में भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता के नुकसान और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के उपायों को रेखांकित किया गया है।
चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए डिजिटल मंचों पर जोर
चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े संकलन में कचरा प्रबंधन, डिजिटल अपशिष्ट विनिमय मंच, पुनर्चक्रण प्रमाणन और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व जैसे उपायों को शामिल किया गया है।
इसमें भारत के बाजार आधारित विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व ढांचे और डिजिटल मंचों के विस्तार को भी रेखांकित किया गया है।
तकनीकी सहयोग और संयुक्त शोध पर जोर
बैठक में BRICS देशों के बीच क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ पर्यावरणीय निगरानी और मूल्यांकन के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरत बताई गई।







