हेल्थ डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में बच्चों के कैंसर के 10 में से करीब 7 मामले भारत में दर्ज होते हैं। यह जानकारी मेडिकल जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ - साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नई स्टडी में सामने आई है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि भारत में बच्चों के कैंसर का वास्तविक बोझ दर्ज मामलों से भी अधिक हो सकता है।
2022 में भारत में सामने आए 25,939 मामले
स्टडी के मुताबिक, वर्ष 2022 में दक्षिण एशिया में 14 साल तक के करीब 37,700 बच्चों में कैंसर की पहचान हुई, जबकि 17,700 बच्चों की मौत हो गई। इनमें भारत में 25,939 मामले दर्ज हुए, जो SAARC देशों के कुल मामलों का करीब 68 प्रतिशत है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में बच्चों की आबादी बड़ी होने के कारण मामले अधिक हैं, लेकिन अधूरे कैंसर रजिस्ट्रेशन और सीमित जांच सुविधाओं के चलते वास्तविक संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।
बच्चों में सबसे ज्यादा ब्लड कैंसर
स्टडी के अनुसार, बच्चों में सबसे आम कैंसर ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) है। यह मुख्य रूप से जीन में बदलाव और आनुवंशिक कारणों से होता है। इसका संबंध जीवनशैली या बढ़ती उम्र से नहीं होता।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि बीमारी की पहचान समय रहते हो जाए, तो बच्चों के कैंसर का इलाज काफी हद तक संभव है। लेकिन भारत में ग्रामीण इलाकों में इलाज की सुविधा सीमित है। कई परिवारों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे इलाज और यात्रा का खर्च बढ़ जाता है।
अंडर-डायग्नोसिस भी बड़ी चुनौती
स्टडी में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में दुनिया के करीब एक-चौथाई बच्चे रहते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर बच्चों के कैंसर के केवल 15 प्रतिशत मामले ही यहां दर्ज होते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी कम है, बल्कि कई मामलों में समय पर जांच नहीं हो पाती, कैंसर का रजिस्ट्रेशन अधूरा रहता है और जांच सुविधाएं सीमित हैं।







