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भारत-अफगानिस्तान के बीच 2026 में व्यापार एक अरब डॉलर के पार

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

काबुल, भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच कुल व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक है। क्षेत्रीय अस्थिरता और विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के बावजूद व्यापार में हुई यह बढ़ोतरी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के विस्तार का संकेत मानी जा रही है।

एक रिपोर्ट के अनुसार 21 मार्च 2025 से 20 मार्च 2026 तक की अवधि में दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी। इस दौरान अफगानिस्तान से भारत को बड़े पैमाने पर कृषि और अन्य उत्पादों का निर्यात किया गया, जबकि भारत से भी कई आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अफगान बाजारों तक पहुंची। व्यापारिक आंकड़ों में हुई बढ़ोतरी से यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 के दौरान अफगानिस्तान ने भारत को 77 करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य के सामानों का निर्यात किया। इसमें सूखे मेवे, केसर, फल, औषधीय उत्पाद और अन्य पारंपरिक वस्तुओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही। भारतीय बाजार में अफगान उत्पादों की मांग बढ़ने से निर्यात को भी मजबूती मिली है, जिसका सीधा लाभ वहां के व्यापारियों और उत्पादकों को प्राप्त हुआ।

इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में भारत और अफगानिस्तान के बीच कुल व्यापार लगभग 89 करोड़ डॉलर के आसपास दर्ज किया गया था। मौजूदा आंकड़ों की तुलना में यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक सहयोग में आये विस्तार को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक संपर्कों में सुधार और बाजारों के बीच बढ़ती पहुंच ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों और क्षेत्रीय प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां लगातार जारी रहना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। परिवहन और लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद व्यापारिक मार्गों को सक्रिय बनाए रखने के प्रयासों का सकारात्मक असर भी आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संबंधों में और विस्तार होने की संभावना है। दोनों देशों के कारोबारी वर्ग कृषि, खाद्य उत्पाद, दवाइयों और निर्माण सामग्री जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में रुचि दिखा रहे हैं। इससे भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार को और गति मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि व्यापार में लगातार हो रही वृद्धि केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग के मजबूत होते रिश्तों को भी दर्शाती है। बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच व्यापारिक साझेदारी का मजबूत बने रहना दोनों देशों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।