विदेश डेस्क, ऋषि राज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया मिलकर दुनिया के लिए एक विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने यह बात ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति, विशाल बाजार और उत्पादन क्षमता तथा ऑस्ट्रिया की तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक दक्षता मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विश्वसनीय साझेदारों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
दोनों नेताओं के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विनिर्माण और तकनीकी विकास को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें ऑस्ट्रिया की भागीदारी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी भारत और ऑस्ट्रिया ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच शिक्षा सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट को नर्सिंग सहित अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने का फैसला लिया गया। इससे भारतीय युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर मिलेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत हॉलिडे वर्किंग प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इससे दोनों देशों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, कार्यशैली और शिक्षा व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया दोनों का मानना है कि युद्ध और सैन्य टकराव किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थक है।
ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने भी भारत को यूरोप का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध आने वाले समय में और मजबूत होंगे। उन्होंने व्यापार, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत के साथ गहरे सहयोग की इच्छा जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ऑस्ट्रिया सहयोग से व्यापार, रोजगार, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।







