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भारत-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान

लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।

जिलाधिकारी ने एसएसबी के साथ की उच्चस्तरीय समीक्षा। एसएसबी कैंप, बीओपी और चेकपोस्ट के लिए भूमि अधिग्रहण और दाखिल-खारिज की प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करने का सख्त निर्देश।

पूर्वी चंपारण: भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और सामरिक महत्व के विषयों को लेकर शनिवार को 47वीं वाहिनी एसएसबी कैंप रक्सौल के सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सीमा सुरक्षा बल (SSB) और जिला प्रशासन के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में आ रही समस्याओं के समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में 20वीं, 47वीं और 71वीं वाहिनी के कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट सहित जिला व अनुमंडल स्तर के वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

अतिक्रमण मुक्त होगी 'नो मेंस लैंड'

बैठक के दौरान एसएसबी कमांडेंट ने सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों और एसएसबी की भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि 'नो मेंस लैंड' (दशगजा क्षेत्र) में कई जगहों पर अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही सीमा रेखा से 0-5 किलोमीटर और 0-15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद अतिक्रमण का डेटा भी साझा किया गया। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल 'अनुमंडल स्तरीय सतर्कता समिति' गठित करने का निर्देश दिया। इस समिति में एसएसबी के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे, जो आपसी समन्वय के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ निरंतर सघन अभियान चलाएंगे।

वाइब्रेंट विलेज और भूमि अधिग्रहण पर जोर

जिलाधिकारी ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए 'बॉर्डर वाइब्रेंट विलेज' योजना की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने एसएसबी कैंपों और बीओपी (बॉर्डर आउटपोस्ट) चेकपोस्ट के निर्माण हेतु लंबित भूमि अधिग्रहण के मामलों और दाखिल-खारिज की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े इन बुनियादी ढांचों के लिए भूमि संबंधी सभी अड़चनों को अविलंब दूर कर अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समन्वय से बेहतर होगी सीमा सुरक्षा

समीक्षा बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा में एसएसबी का योगदान अहम है और जिला प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में रक्सौल के एसडीएम, एसडीपीओ और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, मोतिहारी सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे नियमित रूप से सीमा क्षेत्रों का दौरा करें ताकि सुरक्षा और विकास योजनाओं में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।