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भारत-नॉर्वे ने नौ समझौतों से सहयोग को नई दिशा दी

विदेश डेस्क, ऋषि राज

ओस्लो: भारत और नॉर्वे ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए अपने सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नौ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही दोनों देशों ने तीन नई रणनीतिक पहलों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य हरित प्रौद्योगिकी, समुद्री सहयोग, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देना है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को “ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक ले जाने पर भी सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय नॉर्वे यात्रा के दौरान नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ विस्तृत वार्ता हुई। बैठक में वैश्विक जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और नॉर्वे समान लोकतांत्रिक मूल्यों, पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और सतत विकास के साझा दृष्टिकोण से जुड़े हुए हैं।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में बताया गया कि दोनों देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और नॉर्वे की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच सहयोग का ढांचा तैयार किया है। इसके अलावा डिजिटल विकास साझेदारी पर विदेश मंत्रालयों के बीच समझौता हुआ तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में दोनों देशों के मंत्रालयों के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया।

नॉर्वे ने भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की, जबकि भारत ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित “नॉर-शिपिंग” कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी का निर्णय लिया। इससे समुद्री परिवहन, हरित शिपिंग और बंदरगाह विकास के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

दोनों देशों ने हरित हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर तकनीक, अपतटीय पवन ऊर्जा और स्वच्छ समुद्री तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही शिक्षा, शोध, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे की यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे ने भारत को विश्व अर्थव्यवस्था और हरित परिवर्तन का प्रमुख भागीदार बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती प्रदान करेंगे।