विदेश डेस्क, ऋषि राज
अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सहयोग और आर्थिक विकास से जुड़े छह महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही यूएई ने भारत में पांच अरब डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है। इन समझौतों को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच अबू धाबी में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संबंधों को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई।
हस्ताक्षरित समझौतों में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं, पेट्रोलियम भंडारण, बंदरगाह विकास, समुद्री सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ेगा और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को गति मिलेगी।
यूएई द्वारा घोषित पांच अरब डॉलर का निवेश भारत में बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूएई के संबंध विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और स्थिर, समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए मिलकर काम करेंगे। वहीं राष्ट्रपति बिन जायद ने भारत को विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी भी इस संबंध को विशेष मजबूती प्रदान करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ताजा समझौते पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति और वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।







