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भारतीय बैडमिंटन की पहचान साइना नेहवाल ने ली खेल से विदा

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |

भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने 19 जनवरी 2026 को खेल जगत को यह बड़ी खबर दी। 35 वर्षीय साइना पिछले काफी समय से घुटने की गंभीर चोट और गठिया (Arthritis) से जूझ रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके घुटनों का कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिसके कारण उनके लिए उच्च स्तर की ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा जारी रखना अब संभव नहीं रह गया है।

​अपनी शर्तों पर विदा ली

​साइना ने अपनी सेवानिवृत्ति पर बात करते हुए कहा, "मैंने वास्तव में दो साल पहले ही खेलना बंद कर दिया था। मुझे लगा कि मैंने अपनी शर्तों पर इस खेल में प्रवेश किया था और अपनी शर्तों पर ही इसे छोड़ रही हूँ, इसलिए किसी औपचारिक घोषणा की जरूरत महसूस नहीं हुई।" उन्होंने आगे साझा किया कि पेशेवर बैडमिंटन के लिए जिस तरह की 8-9 घंटे की कड़ी मेहनत चाहिए होती है, उनका शरीर अब उसे सहन नहीं कर पा रहा था। अभ्यास के दौरान एक-दो घंटे में ही उनके घुटने सूज जाते थे, जिसके बाद उन्होंने यह कठिन फैसला लिया।

​एक ऐतिहासिक करियर की उपलब्धियाँ
​साइना नेहवाल केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय बैडमिंटन की मशाल वाहक रही हैं। उनके करियर की कुछ प्रमुख झलकियाँ इस प्रकार हैं:

  • ​ओलंपिक पदक: वह ओलंपिक में बैडमिंटन पदक (लंदन 2012 - कांस्य) जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
  • ​वर्ल्ड नंबर-1: साल 2015 में वह विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला शटलर बनीं।
  • ​कॉमनवेल्थ गेम्स: उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में दो बार (2010 और 2018) स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया।
  • ​पायनियर: उन्होंने सुपर सीरीज खिताब जीतकर और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतकर भारतीय युवाओं के लिए बैडमिंटन को करियर के रूप में चुनने का रास्ता खोला।

​चोटों से संघर्ष और वापसी

​साइना का करियर चोटों से काफी प्रभावित रहा, विशेषकर 2016 रियो ओलंपिक के दौरान लगी घुटने की चोट ने उनके प्रदर्शन पर गहरा असर डाला। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता। हालांकि, 2023 के सिंगापुर ओपन के बाद से वह किसी भी बड़े टूर्नामेंट में नजर नहीं आईं। अंततः, अपनी शारीरिक सीमाओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने कोर्ट को अलविदा कहना ही सही समझा।
​साइना नेहवाल का संन्यास भले ही एक खिलाड़ी के तौर पर उनके सफर का अंत हो, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने सिखाया कि कैसे एक मध्यमवर्गीय लड़की अपनी मेहनत और लगन से दुनिया के शिखर तक पहुँच सकती है।