लोकल डेस्क, एन के सिंह।
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सदर अस्पताल, विकास भवन और मॉल जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने, आग बुझाने और ड्रोन कैमरों से निगरानी करने का जीवंत अभ्यास संपन्न
पूर्वी चंपारण: जिला भूकंप संवेदनशीलता की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील 'जोन 6' में आता है, जिसे देखते हुए जिले की आपदा प्रबंधन तैयारियों को परखने के लिए एक व्यापक मॉक अभ्यास का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के तत्वाधान में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित इस अभ्यास ने जिले की प्रशासनिक तत्परता और राहत-बचाव एजेंसियों के बीच समन्वय की एक ठोस तस्वीर पेश की। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के निर्देशन में जिले के पांच प्रमुख सिमुलेशन केंद्रों पर एक साथ सुबह ठीक 8:20 बजे सायरन गूंजते ही राहत कार्य शुरू कर दिए गए, जिससे पूरे शहर में आपदा से निपटने की सरगर्मी तेज हो गई।
इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र बिंदु गांधी मैदान को बनाया गया था, जिसे 'स्टेजिंग एरिया' के रूप में विकसित किया गया। जैसे ही सुबह भूकंप की सूचना प्राप्त हुई, कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से डीडीसी डॉ. प्रदीप कुमार ने कमान संभाली और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, मेडिकल टीम, एनसीसी और फायर ब्रिगेड की टीमों को टास्क सौंपते हुए निर्धारित पांच स्थानों की ओर रवाना किया। इन स्थानों में सदर अस्पताल, V2 मॉल राजबाजार, एस.वी. पेट्रोल पंप छोटा बरियारपुर, इंजीनियरिंग कॉलेज मोतिहारी और विकास भवन (समाहरणालय) शामिल थे। खास बात यह रही कि सभी साइट्स से चल रहे बचाव कार्य की लाइव वेबकास्टिंग की गई, जिसे पटना स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र और नई दिल्ली में एनडीएमए के विशेषज्ञ सीधा देख रहे थे और आवश्यक निर्देश दे रहे थे।
सदर अस्पताल में चले अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने मलबे और खतरे के बीच फंसे तीन व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान आधुनिक उपकरणों और ड्रोन कैमरों का भी प्रयोग किया गया ताकि आपदा की स्थिति में सटीक जानकारी जुटाई जा सके। वहीं, अन्य सिमुलेशन साइट्स पर एसडीआरएफ और अग्निशमन विभाग की टीमों ने ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने और आग बुझाने की बारीकियों का प्रदर्शन किया। एसएसबी की 71वीं वाहिनी के 2nd AC नीरज कुमार के नेतृत्व में ऑब्जर्वर्स की टीम ने प्रत्येक गतिविधि का बारीकी से निरीक्षण किया और जिले की तैयारियों को उत्कृष्ट श्रेणी में रखते हुए अपने अनुभव साझा किए।
सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने सफल आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना और आम नागरिकों को आपदा के प्रति जागरूक करना था। सदर अस्पताल में खुद उपस्थित रहकर डीडीसी डॉ. प्रदीप कुमार ने बचाव कार्यों का अनुश्रवण किया। जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि नागरिकों को आपदा से निपटने के गुर सिखाने के लिए इस तरह के आयोजन भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि किसी भी वास्तविक संकट की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।







