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भूटान के PM ने किया राजगीर में बड़वाल भूटान मोनेस्ट्री का उद्घाटन

नेशनल डेस्क, वेरोनिका राय |

भूटान के प्रधानमंत्री ने किया राजगीर में बड़वाल भूटान मोनेस्ट्री का उद्घाटन, नीतीश कुमार और किरेण रिजिजू भी रहे शामिल

राजगीर: बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल राजगीर में गुरुवार को भव्य समारोह के बीच बड़वाल भूटान मोनेस्ट्री का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर भूटान के प्रधानमंत्री लायोनचेन तैसो तेहरी टोब्गे विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू भी शामिल हुए। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया था।

भव्य तैयारी और कड़ी सुरक्षा

उद्घाटन समारोह को लेकर पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक लाइट से सजाया गया। मंदिर के मुख्य द्वार पर भारतीय तिरंगे के साथ-साथ भूटान का राष्ट्रीय ध्वज और बौद्ध धर्म का झंडा भी फहराया गया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। संभावित मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई और कारकेड का ट्रायल भी पहले ही सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था।

विश्वविद्यालय में संवाद

भूटान के प्रधानमंत्री बुधवार को ही राजगीर पहुंच गए थे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय में ठहराया गया, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया। छात्रों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने भारत-भूटान संबंधों और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।

छह दिनों तक चलेगी पूजा-अर्चना

उद्घाटन के बाद मोनेस्ट्री में लगातार छह दिनों तक विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। इसमें भूटान के मुख्य भिक्षु जे खेम्पो, भारत में भूटान के राजदूत सुधाकर दलेला और बड़ी संख्या में भूटान से आए बौद्ध धर्मावलंबी भी भाग लेंगे।

सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा

राजगीर की धरती भगवान बुद्ध के उपदेशों की साक्षी रही है। यहां भूटान मोनेस्ट्री का निर्माण भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मोनेस्ट्री से न केवल दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

नव-निर्मित भूटान मोनेस्ट्री आने वाले समय में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण केंद्र बनेगी। जैसे बोधगया, नालंदा और वैशाली जैसे बौद्ध स्थल श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं, वैसे ही राजगीर की यह मोनेस्ट्री भी लोगों को खास अनुभव देगी। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इसके उद्घाटन के बाद होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं और स्थानीय व्यवसायों को बड़ा लाभ होगा।

अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और भूटान के बीच सदियों से मजबूत सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध रहे हैं। इस मोनेस्ट्री के उद्घाटन से इन रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह आयोजन भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ को भी मजबूत करता है, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और साझेदारी पर जोर दिया जाता है।

नालंदा और राजगीर का महत्व

राजगीर और नालंदा हमेशा से बौद्ध धर्म और शिक्षा के वैश्विक केंद्र रहे हैं। यहां का ऐतिहासिक महत्व न केवल भारत, बल्कि पूरे एशिया के लिए खास है। ऐसे में भूटान मोनेस्ट्री इस विरासत को और समृद्ध करेगी।

राजगीर में बड़वाल भूटान मोनेस्ट्री का उद्घाटन केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत-भूटान संबंधों को नई मजबूती देने वाला ऐतिहासिक अवसर है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होगी और राजगीर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनेगा।