लोकल डेस्क, अभिलाष गुप्ता।
वीरगंज: रसुवा के भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों की राहत एवं पुनर्वास के लिए वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ ने 15 लाख 1 हजार 101 रुपये की सहायता प्रदान की है।
संघ ने उक्त राशि का चेक प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष में जमा कराया है। बाढ़ प्रभावित नागरिकों को राहत एवं पुनर्वास में सहयोग पहुंचाने के उद्देश्य से संघ ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत यह सहायता उपलब्ध कराई है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण रसुवा के स्याफ्रुबेँसी, टिमुरे सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारी क्षति हुई है। इसके अलावा नुवाकोट, धादिङ और गोरखा समेत अन्य जिले भी प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से हुई जनधन की क्षति पर दुख व्यक्त करते हुए संघ ने कहा कि आपदा के समय प्रभावित नागरिकों की सहायता करना निजी क्षेत्र का भी सामाजिक दायित्व है।
संघ ने बाढ़ पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत, उद्धार तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सरकार के संबंधित निकायों, विभिन्न संघ–संस्थाओं, उद्योगी–व्यवसायियों तथा आम नागरिकों से अपने-अपने स्तर से सहयोग करने का आग्रह किया है। प्राकृतिक आपदा एवं संकट के समय विगत से ही प्रभावित समुदायों को सहयोग करता आ रहा संघ ने आगामी दिनों में भी मानवीय एवं सामाजिक कार्यों में निरंतर सहयोग और सहकार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
संघ के अनुसार, आपदा के समय सरकार द्वारा किए जा रहे राहत एवं पुनर्वास प्रयासों में निजी क्षेत्र की सहभागिता और सहयोग से प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। संघ ने सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकता के अनुसार आगामी दिनों में भी सहयोग जारी रखने की बात कही है।
चेक हस्तांतरण कार्यक्रम में वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरिप्रसाद गौतम, निवर्तमान अध्यक्ष अनिलकुमार अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष माधव राजपाल, महासचिव शिवजीप्रसाद साह, कोषाध्यक्ष अनोज रुँगटा, सचिव प्रेमचन्द्र गोयल, सह–कोषाध्यक्ष निरज अग्रवाल, सह–सचिव अनुप अग्रवाल तथा कार्यकारी सचिव सुनीलकुमार कण्ठ सहित संघ के पदाधिकारी एवं सदस्यों की उपस्थिति रही।
वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ ने बताया कि वह इससे पहले भी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं एवं सामाजिक संकटों के समय प्रभावित नागरिकों को राहत तथा सहयोग उपलब्ध कराता रहा है। संघ ने आगामी दिनों में भी मानवीय सेवा के कार्यों में सक्रिय रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।







