विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
न्यूयॉर्क। मंगल ग्रह पर नासा का परसेवरेंस रोवर लगातार अपनी खोज आगे बढ़ा रहा है। रोवर ने अब मंगल की सतह पर 28.1 मील यानी करीब 45.2 किलोमीटर की दूरी तय कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह पृथ्वी के बाहर सौरमंडल में किसी भी वाहन द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी है। इस दौरान रोवर चट्टानों के बीच से अपना रास्ता बनाते हुए मंगल के बेहद पुराने भूगर्भीय इतिहास से जुड़े संकेतों की तलाश कर रहा है।
परसेवरेंस ने नासा के ही अपार्चुनिटी रोवर का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा है। अपार्चुनिटी ने मंगल पर कुल 28.06 मील की दूरी तय की थी। 11 अक्टूबर को परसेवरेंस इस दूरी को पार कर गया और 28.1 मील का सफर पूरा कर लिया। हालांकि, रोवर की उपलब्धि सिर्फ दूरी का नया रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य मंगल की अरबों साल पुरानी चट्टानों का अध्ययन करना और यह पता लगाना है कि लाल ग्रह का इतिहास किस तरह विकसित हुआ।
फिलहाल परसेवरेंस ‘लैक डे चार्म्स’ नाम के क्षेत्र में मौजूद है, जहां वह करीब चार अरब साल पुरानी चट्टानों का अध्ययन कर रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन चट्टानों की संरचना और उनमें मौजूद संकेतों से मंगल के प्राचीन वातावरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। रोवर का अगला लक्ष्य 100 किलोमीटर की दूरी पूरी करना है। अपार्चुनिटी रोवर को भी मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए भेजा गया था और उसने लंबे समय तक वहां वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाया था।
परसेवरेंस अगस्त में ही अपार्चुनिटी का दूरी का रिकॉर्ड तोड़ सकता था, लेकिन रास्ते में उसे कुछ असामान्य और हल्के रंग की चट्टानें दिखाई दीं। वैज्ञानिकों को लगा कि इन चट्टानों में मंगल के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपी हो सकती है। इसके बाद रोवर ने अपना रास्ता आगे बढ़ाने के बजाय करीब दो महीने तक इन चट्टानों की जांच और अध्ययन किया। इस वजह से रिकॉर्ड बनने में देरी हुई, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए चट्टानों का अध्ययन अधिक महत्वपूर्ण रहा।
मिशन की वैज्ञानिक प्रमुख केटी स्टैक मार्गन के अनुसार, परसेवरेंस का वास्तविक उद्देश्य दूरी का रिकॉर्ड बनाना नहीं है। रोवर को मंगल की चट्टानों और उनके इतिहास को समझने के लिए तैयार किया गया है। चट्टानों के अध्ययन से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अरबों साल पहले मंगल की सतह और उसका वातावरण कैसा था। इसी वैज्ञानिक खोज के चलते रोवर रास्ते में मिलने वाली असामान्य चट्टानों का भी विस्तार से अध्ययन कर रहा है।
परसेवरेंस फरवरी 2021 में मंगल के जेज़ेरो क्रेटर में उतरा था और तब से लगातार वहां खोज कर रहा है। जेज़ेरो क्रेटर को मिशन के लिए इसलिए चुना गया था क्योंकि माना जाता है कि इस क्षेत्र में कभी एक प्राचीन झील और नदी मौजूद थी। यहां मौजूद चट्टानों में मंगल के पुराने जल-पर्यावरण और संभावित जीवन के संकेत मिल सकते हैं। इसी वजह से परसेवरेंस का मिशन मंगल पर कभी जीवन मौजूद था या नहीं, इससे जुड़े सुराग तलाशने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
परसेवरेंस के साथ छोटा हेलीकॉप्टर इनजेनुइटी भी मंगल पर भेजा गया था। मंगल की सतह पर पहुंचने के बाद इनजेनुइटी ने किसी दूसरे ग्रह पर पहली नियंत्रित उड़ानें भरकर इतिहास रचा। वहीं, परसेवरेंस की एक बड़ी विशेषता इसकी स्वचालित ड्राइविंग तकनीक है। यह अपने कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम की मदद से आगे के रास्ते का आकलन कर सकता है और चट्टानों तथा अन्य बाधाओं के बीच सुरक्षित रास्ता चुनते हुए अपनी यात्रा जारी रख सकता है।







