नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय
मणिपुर: मणिपुर में सुरक्षाबलों और राज्य पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाते हुए विभिन्न प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े आठ उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पिछले चौबीस घंटों के भीतर राज्य के अलग-अलग जिलों में की गई, जिसमें खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई। गिरफ्तार किए गए उग्रवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है, जिसमें एक संदिग्ध 4.6 किलोग्राम का सुधारा हुआ विस्फोटक उपकरण (आईईडी) भी शामिल है। यह अभियान "स्पेशल कमांडो यूनिट" सहित अन्य सुरक्षा इकाइयों के समन्वय से चलाया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री में पिस्तौलें, राइफलें, हैंड ग्रेनेड, डेटोनेटर, गोलियां और अन्य विस्फोटक उपकरण शामिल हैं, जिन्हें एक मेज पर व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित कर मीडिया के सामने रखा गया। तस्वीर में सुरक्षाबलों के जवान वर्दी में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिनके पीछे "स्पेशल कमांडो यूनिट" के बैनर के साथ बरामद हथियारों की मेज सजाई गई है। इस तरह के प्रदर्शन आमतौर पर पुलिस द्वारा जनता को यह भरोसा दिलाने के लिए किए जाते हैं कि सुरक्षा अभियान प्रभावी ढंग से चल रहे हैं और अवैध हथियारों की तस्करी पर लगाम कसी जा रही है।
मणिपुर पिछले कई वर्षों से जातीय हिंसा और उग्रवादी गतिविधियों से जूझ रहा है, जिसके चलते सुरक्षाबल राज्य के संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी और क्षेत्र-वर्चस्व अभियान चला रहे हैं। म्यांमार से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे रोकने के लिए सुरक्षाबल नियमित रूप से नाके लगाकर वाहनों की जांच कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए उग्रवादी जबरन वसूली, अपहरण और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिनसे संबंधित मामलों की जांच जारी है।
इस तरह की कार्रवाइयां मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हथियार बरामदगी और गिरफ्तारियों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। राज्य में जारी अशांति के मूल कारणों, जातीय तनाव, आर्थिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता को दूर किए बिना दीर्घकालिक शांति स्थापित करना कठिन होगा। बहरहाल, सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई आम जनता के बीच सुरक्षा की भावना को मजबूत करने और उग्रवादी नेटवर्क को कमजोर करने में सहायक साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में पुलिस द्वारा और भी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है, जिससे इस अभियान के व्यापक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।







