नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और लोगों के मतदान का अधिकार ‘गायब’ कर दिया गया।
एसआईआर को लेकर ममता का आरोप
नई दिल्ली में गुरुवार को अभिषेक बनर्जी के सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा कि वह ज्ञानेश कुमार को ‘वैनिश कुमार’ कहती हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने लोगों के वोट देने के अधिकार को ‘वैनिश’ कर दिया है।
ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने थे, जबकि एसआईआर की प्रक्रिया सितंबर में शुरू की गई। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस 100 पीड़ितों को लेकर अदालत भी गई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
उन्होंने बताया कि 2021 में कोलकाता विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल करीब 4.55 लाख वोटों से जीती थी, जबकि एसआईआर में करीब 6.97 लाख नाम हटाए गए। नदिया में जीत का अंतर 20,903 वोट था और एसआईआर में 4,87,565 नाम हटाए गए। उत्तर 24 परगना में जीत का अंतर 9,13,943 वोट था, जबकि 12,60,096 नाम हटाए गए।
बंगाल के अलग-अलग जिलों के आंकड़े गिनाए
ममता ने कहा, "उत्तर दिनाजपुर में 2021 में तृणमूल की जीत का अंतर 2,44,744 वोट था, जबकि एसआईआर में 3,63,646 नाम हटाये गये। पूर्व बर्दवान में 2021 में तृणमूल की जीत का अंतर 2,75,905 वोट था और 2026 में 4,35,864 नाम हटाये गये। पूर्व मेदिनीपुर में हम 2,00,464 मतों से जीते थे, जबकि एसआईआर में 2,73,707 वोट हटा दिये गये।"
उन्होंने कहा, "क्या आप देख सकते हैं कि उन्होंने लोगों को मतदाता सूची से कैसे गायब किया? लोगों को मतदाता सूची से कैसे वंचित किया? ये आंकड़े एसआईआर के दौरान अपनाये गये तरीके को दिखाते हैं।"
केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल
तृणमूल प्रमुख ने चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एक चुनाव क्षेत्र में पार्टी के एजेंटों को कथित तौर पर मारपीट कर बाहर कर दिया गया और इसके बाद सीसीटीवी को ब्लॉक कर दिया गया।
ममता ने दावा किया कि उस समय तृणमूल करीब 15,000 वोटों से आगे चल रही थी, लेकिन बाद में भाजपा ने सीट जीत ली। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया को ‘कैप्चर’, ‘हाइजैक’ और ‘सेंट्रलाइज’ किए जाने का मामला बताया।
एसआईआर के नाम पर सरकार पर तंज
ममता ने एसआईआर के आधिकारिक नाम ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने इसे ‘स्पेशल इंसेंटिव फॉर रूलिंग पार्टी’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा समेत अन्य जगहों पर भी एसआईआर हुआ है, लेकिन उनकी पार्टी ने बंगाल में इस पूरी प्रक्रिया का बिंदुवार अध्ययन किया है।
ईवीएम में आग लगने की घटना का जिक्र
ममता ने चुनाव के बाद ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में आग लगने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नौ मंजिला इमारत की उन मंजिलों पर आग लगी, जहां ईवीएम रखी थीं।
उन्होंने दावा किया कि तृणमूल पहले ही चुनाव जीत चुकी थी और मशीनों को आग के हवाले कर दिया गया। ममता ने आरोप लगाया कि चुनावी धांधली के सबूत इसलिए नष्ट किए गए, ताकि अदालती कार्यवाही से बचा जा सके।
उन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के व्हाट्सऐप ग्रुप की कथित बातचीत साझा करने का भी दावा किया। आरोप लगाया कि चुनाव पर्यवेक्षकों पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का दबाव बनाया जा रहा था।
अभिषेक बनर्जी ने भी आयोग पर उठाए सवाल
ममता ने दावा किया कि पर्यवेक्षकों से मुख्य चुनाव अधिकारी के निर्देशों का पालन करने को कहा जा रहा था। वह बुधवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में भी शामिल हुई थीं, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशभर में अभियान चलाने का फैसला लिया गया।
इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष और राजनीतिक दल पिछले कई महीनों से जिन आरोपों को उठा रहे थे, वैसे ही आरोप अब दो अन्य चुनाव आयुक्त भी उठा रहे हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सवाल
अभिषेक ने एक हालिया समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों को विश्वास में लिए बिना एकतरफा किए गए। उन्होंने कहा कि संविधान के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का दर्जा समान है और फैसले पूर्ण पीठ को लेने चाहिए।
उन्होंने एसआईआर में फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों का विशेष रूप से उल्लेख किया। दावा किया कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों को कुछ फैसलों की जानकारी नहीं थी। अभिषेक ने सवाल उठाया कि ये फैसले किसके इशारे पर और किसे लाभ पहुंचाने के लिए लिए गए।
150 सीटों को लेकर लगाया बड़ा आरोप
अभिषेक ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की 150 विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों और ‘अंडर एडजुडिकेशन’ मामलों की संख्या संबंधित सीटों के जीत के अंतर से अधिक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन 150 सीटों को ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को ‘गिफ्ट’ किया। उनका दावा था कि इन सीटों को घटाने पर भाजपा की सीटों की संख्या 58 रह जाती।
सादगाछिया सीट का उदाहरण देते हुए अभिषेक ने दावा किया कि एक समय तृणमूल करीब 12,000 वोट से आगे चल रही थी। इसके बाद उसके एजेंटों को केंद्रीय बलों और भाजपा के लोगों ने कथित तौर पर बाहर कर दिया। उनके अनुसार बाद में भाजपा करीब 400 वोट से सीट जीत गई।
सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की चुनौती
अभिषेक ने ज्ञानेश कुमार को चुनौती दी कि उस दिन दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के करीब एक महीने बाद, जून के पहले सप्ताह में करीब 4,000 ईवीएम मशीनें आग में नष्ट हो गईं।
अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल
अभिषेक ने कहा कि घटना के तीन महीने बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उनका कहना था कि इन मशीनों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए था।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की बाद की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। अभिषेक के मुताबिक, नई सरकार बनने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी को मुख्य सचिव बनाया गया। एक रोल अधिकारी को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया, जबकि भवानीपुर के रिटर्निंग अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष पद दिया गया।
‘आयोग को खुद देना चाहिए जवाब’
अभिषेक ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों का जवाब राजनीतिक दलों को नहीं, बल्कि आयोग को खुद देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी 150 सीटों के आंकड़े हैं, जहां मतदाता सूची से हटाए गए नाम जीत के अंतर से अधिक हैं। उन्होंने इन सभी मामलों की विस्तृत जांच की मांग की।







