नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली l राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सांसदों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन कुछ राष्ट्रीय मुद्दे ऐसे होते हैं जिन पर सर्वसम्मति ही संविधान की सच्ची भावना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प किसी एक सरकार या पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत राष्ट्रीय यात्रा है, जिसमें संसद, सरकार और नागरिक—तीनों की सामूहिक भूमिका अहम है। उन्होंने सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी, स्वच्छता, एकता और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर एकमत होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पिछले 11 वर्षों में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। महंगाई नियंत्रण, बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में व्यापक वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाखों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे हैं।
राष्ट्रपति ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जहां पहले 126 जिले प्रभावित थे, वहीं अब यह संख्या घटकर आठ जिलों तक सीमित रह गई है। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों और विकास कार्यों की संयुक्त सफलता बताया। आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में सड़क, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत दो करोड़ से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को दी गई पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों से करोड़ों युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
राष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से उत्पन्न चुनौतियों, फेक न्यूज और डीपफेक जैसे खतरों पर भी चिंता जताई और इनसे निपटने के लिए गंभीर विमर्श की जरूरत बताई। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयास, अनुशासन और निरंतरता के साथ भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच भी विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ता रहेगा।







