नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर देश को एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि हासिल हुई है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले 18 वर्षों से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार शाम आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने समझौते के सभी पहलुओं पर सहमति बना ली है और कल, 27 जनवरी को दोपहर 1:30 बजे भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते की विशालता और इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया है।
यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2007 में शुरू हुई यह वार्ता कई बाधाओं के बाद अब अपने अंजाम तक पहुंची है। वाणिज्य सचिव के अनुसार, वार्ता का समापन हो चुका है और अब अगले 5-6 महीनों में कानूनी बारीकियों (Legal Scrubbing) को पूरा किया जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि यह समझौता 2027 की शुरुआत से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों के बीच भारत और यूरोपीय संघ के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देना है।
समझौते के लागू होने से भारत के आम नागरिकों और व्यापारियों दोनों को बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय लग्जरी कारें (मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी), विदेशी शराब, चॉकलेट और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर आयात शुल्क में भारी कटौती होगी, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे। कारों पर वर्तमान में लगने वाले 110% शुल्क को चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव है। वहीं दूसरी ओर, भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे कपड़ा (Textiles), चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, और इंजीनियरिंग सामानों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के बाजारों में 'जीरो ड्यूटी' यानी बिना किसी सीमा शुल्क के पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'मेगा डील' से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में जबरदस्त उछाल आएगा, बल्कि भारत में भारी विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। साथ ही, यह समझौता भारतीय पेशेवरों, विशेषकर आईटी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और डॉक्टरों के लिए यूरोप में रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। कल होने वाले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा करेंगे।







