Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

मन की बात में मोदी ने शिक्षा नवाचार पर दिया जोर, ‘अन्वेषण’ पहल की तारीफ

नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l

नई दिल्ली l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में शिक्षा प्रणाली में बदलाव और नवाचार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल किताबों तक सीमित शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को प्रयोग आधारित सीखने की ओर बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ‘करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान’ कहावत का उल्लेख करते हुए बताया कि निरंतर अभ्यास से ही ज्ञान और समझ विकसित होती है।

प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु में चल रही ‘अन्वेषण’ पहल की सराहना की, जो स्कूल स्तर पर विज्ञान शिक्षा को रोचक और व्यावहारिक बनाने का प्रयास कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को केमिस्ट्री, अर्थ साइंस और वेलनेस जैसे विषयों में रिसर्च और नवाचार का अवसर मिल रहा है। इससे छात्रों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, बल्कि वे अपने प्रोजेक्ट्स को प्रस्तुत करने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र विज्ञान पढ़ना चाहते हैं, लेकिन डर और जटिलता के कारण पीछे हट जाते हैं। ‘अन्वेषण’ जैसी पहलें इस डर को कम करने और विषय को आसान व दिलचस्प बनाने में सहायक हैं। जब छात्र खुद प्रयोग करते हैं, तो उनमें जिज्ञासा और रुचि स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

विश्लेषण के तौर पर देखा जाए तो सरकार का यह फोकस शिक्षा को अधिक प्रैक्टिकल और स्किल-आधारित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे भविष्य में न केवल बेहतर वैज्ञानिक तैयार होंगे, बल्कि नवाचार और शोध की संस्कृति भी मजबूत होगी। यह पहल नई पीढ़ी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।