लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: "B" का मतलब "Birth" और "D" का मतलब "Death" ये दोनों में से एक भी हमारे हाथ में नहीं है परंतु "B" और "D" के बीच "C" आता है "C" का मतलब "Choice"। ये हमारे हाथ में है जीवन कैसे जीना है ?, ये हमारे हाथ में है। "वर्तमान" को आनंद से जीयें,"भूतकाल" को भूल जायें , "भविष्य" को कुदरत पे छोड़ दें।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। प्रतिपल वर्तमान में जीना ही जीवन जीने की कला है।कुछ समस्या समय के साथ अपने आप हल हो जाती है, लेकिन अनावश्यक प्रतिक्रियाओं से हम ही उसे बड़ा बना देते हैं। चिंता तो शरीर को जलाती ही है पर चिंता मन को धीरे-धीरे खामोशी से जला देती है,चाहे आज आप कुछ न करें और एक अनिश्चित कल के लिए तैयार हो जाएं या आज आप अपने कल को बेहतर और उज्ज्वल बनाने के लिए कुछ अच्छा करें।
"शब्द" मुफ्त में मिलते हैं, लेकिन उनके चयन पर "निर्भर" करता है कि उनकी "कीमत" "मिलेगी" या "चुकानी" पड़ेगी। सफलता हमेशा अच्छे विचारों से आती है। अच्छे विचार अच्छे लोगों के सम्पर्क से आते हैं।राह संघर्ष की जो चलता है,वो ही संसार को बदलता है,जिसने रातों से जंग जीती,सूर्य बनकर वही निकलता है। जब हम परमात्मा के सामने बच्चा बन जाते हैं तो उनका प्रेम और मार्गदर्शन हमारे जीवन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता है। यह सरल समर्पण मन को हल्का और आत्मा को आनंदित कर देता है। जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है खुद को बदल लें क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है। अपनों ने ही बदली है अपनेपन की परिभाषा फिर भी अपनों से ही होती है अपनेपन की अभिलाषा।







