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महाशिवरात्रि 2026: 300 साल बाद दुर्लभ संयोग, शिव कृपा का सुनहरा मौका

स्पेशल रिपोर्ट, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। 300 साल बाद बन रहे दुर्लभ ग्रहीय संयोग में इस बार महाशिवरात्रि का पर्व भक्तों के लिए और भी शक्तिशाली साबित होगा। 15 फरवरी को मनाए जाने वाले इस त्योहार में सरवार्थ सिद्धि योग और श्रवण नक्षत्र का योग मिलकर हर मनोकामना पूरी करने की क्षमता रखता है।

इस साल महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का प्राकट्य और माता पार्वती से विवाह की याद में लाखों भक्त शिवालयों में उमड़ेंगे। शिवलिंग पर जलाभिषेक और रात्रि जागरण से जीवन में ऊर्जा, साहस और शांति का संचार होगा। लेकिन तिथि को लेकर भ्रम दूर करना जरूरी है- शास्त्रों के मुताबिक 15 फरवरी ही सही दिन है, क्योंकि निशिथ काल में चतुर्दशी तिथि इसी रात रहेगी।

तिथि और शुभ मुहूर्त: कब शुरू होगा अभिषेक?

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। निशिथ काल, जो पूजा का सबसे शुभ समय है, 15 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। रात्रि प्रहर पूजा के लिए पहला प्रहर शाम 6:11 से 9:23 बजे तक, दूसरा 9:23 से 12:35 बजे तक, तीसरा 12:35 से 3:47 बजे तक और चौथा 3:47 से 6:59 बजे तक रहेगा।

दिन में जलाभिषेक के लिए पहला मुहूर्त सुबह 8:24 से 9:48 बजे तक, दूसरा 11:12 से दोपहर 12:36 बजे तक और तीसरा दोपहर 2:00 से 3:24 बजे तक रहेगा। भद्रा काल शाम 5:04 से अगली सुबह 5:23 तक रहेगा, इसलिए इस दौरान पूजा से बचें, वरना फल प्रभावित हो सकता है। पारण का समय 16 फरवरी सुबह 6:59 से दोपहर 3:24 बजे तक है।

दुर्लभ संयोग: सरवार्थ सिद्धि और श्रवण नक्षत्र का कमाल

इस महाशिवरात्रि पर 300 वर्ष बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जहां सरवार्थ सिद्धि योग सुबह 7:08 से शाम 7:48 तक रहेगा। यह योग बाधाएं दूर कर सफलता दिलाता है। इसके अलावा श्रवण नक्षत्र शाम 7:48 के बाद शुरू होगा, जो शिव साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त और शिववास का योग भी जुड़ रहा है, जो रुद्राभिषेक के फल को कई गुना बढ़ा देगा। ज्योतिषियों का कहना है कि ऐसे संयोग में की गई पूजा सीधे महादेव तक पहुंचती है, जीवन में नई ऊर्जा भरती है।

ट्रयोडशी-युक्त चतुर्दशी का यह संयोग आध्यात्मिक जागरण और पाप नाश के लिए आदर्श है। भक्तों को व्रत रखकर रात भर जाप, ध्यान और भजन करने से विशेष लाभ मिलेगा। शिव तत्व इस रात धरती पर सबसे अधिक सुलभ होता है, जिससे चक्र जागृत होते हैं।

पूजा विधि: कैसे प्रसन्न करें महादेव?

महाशिवरात्रि पर भक्त सुबह उठकर स्नान करें, फिर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाएं। रात्रि में चार प्रहर की पूजा करें, प्रत्येक में आरती और मंत्र जाप शामिल करें। "ओम नमः शिवाय" का जाप विशेष फलदायी है। मंदिरों में भीड़ लगेगी, इसलिए सुबह जल्दी पहुंचें।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती विवाह हुआ था, इसलिए वैवाहिक सुख की कामना वाले दंपत्ति संयुक्त पूजा करें। व्रत में फलाहार करें, नमक से बचें। रात जागरण से आत्मशुद्धि होती है।

शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं: एक गलती से बिगड़ सकता है फल

पूजा में उत्साह में गलती न करें। शिवलिंग पर तुलसी पत्र कभी न चढ़ाएं, क्योंकि तुलसी विष्णु प्रिया है और शिव को नहीं भाती। शंख से जल न अर्पित करें, क्योंकि शंख असुर का प्रतीक है। केतकी फूल वर्जित है, कथा के अनुसार इससे शिव नाराज हुए थे। टूटे चावल या सिंदूर भी न चढ़ाएं, ये अपूर्णता का संकेत देते हैं। नारियल जल भी निषिद्ध है, क्योंकि नारियल लक्ष्मी का फल है। इनसे बचकर पूजा का पूरा फल पाएं।

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि को सबसे पवित्र रात्रि माना जाता है। देवों के देव महादेव की आराधना से मोक्ष प्राप्ति का द्वार खुलता है। भक्तों का तांता मंदिरों में लगेगा, जहां जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक होगा।

इस पर्व पर आत्मिक जागरण और साधना का महत्व है। भक्ति का हर स्वर महादेव तक पहुंचेगा, जीवन में शांति लाएगा। लेकिन याद रखें, व्रत 15 फरवरी को ही रखें, 16 को नहीं। ज्योतिष गणना से यह स्पष्ट है।