Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

महिला पत्रकारों से मारपीट पर कांग्रेस का हमला

स्टेट डेस्क, श्वेता प्रिया।

 

दिल्ली के साकेत इलाके में दो महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और हिरासत के मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर सरकार की चुप्पी से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।

पत्रकारों ने लगाए मारपीट के आरोप

मामला 3 सितंबर को साकेत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं। दो महिला पत्रकारों, शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया कि रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें पुलिस ने रोका और बाद में साकेत थाने ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। 

पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ पहचान और समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। दोनों ने अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाए और मेडिकल जांच कराने की बात कही। 

दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया गलत

दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के अनुसार, पत्रकारों का स्कूटर निर्धारित वीवीआईपी रूट को बाधित कर रहा था और बार-बार निर्देश देने के बावजूद उसे नहीं हटाया गया। इसके बाद दोनों को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। पुलिस ने मारपीट के आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है। 

निष्पक्ष जांच की मांग

घटना के बाद कई पत्रकार संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर साकेत थाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। 

*कांग्रेस का कहना है कि महिला पत्रकारों के आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, दिल्ली पुलिस अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर रही है।*