विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित अभियान पहले के मुकाबले सीमित अवधि का, लेकिन बेहद तीव्र हो सकता है। इसमें ईरान के ऊर्जा ढांचे, परमाणु ठिकानों और मिसाइल-ड्रोन भंडार को निशाना बनाए जाने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने संभावित अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत सैन्य अभ्यास बढ़ाए गए हैं और इराक के ऊपर उड़ानें भी की जा रही हैं। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने इस सप्ताह इजरायल पहुंचकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों को लेकर चर्चा की। कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि एक और सैन्य कार्रवाई ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव डाल सकती है और उसे कूटनीतिक रियायतें देने के लिए मजबूर कर सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप इस प्रस्तावित अभियान को अंतिम मंजूरी देंगे या नहीं।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से सैन्य योजनाओं पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की गई है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह सैन्य अभियानों से जुड़ी योजनाओं पर टिप्पणी नहीं करता। साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले रखे गए हैं। इससे पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर अमेरिकी और इजरायली पक्षों की ओर से कई चेतावनियां सामने आती रही हैं। इसी महीने की शुरुआत में ईरान पर हमला लगभग होने की स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन ट्रंप ने आखिरी समय में इसे टाल दिया था।
ईरान ने भी किसी नए हमले की स्थिति में कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्स’ है, जबकि ईरान उसे ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्स’ दिखा सकता है। हालांकि, उन्होंने इस कथित हथियार के बारे में कोई तकनीकी जानकारी नहीं दी। मोहेब्बी ने दावा किया कि जून 2025 में हुए 12 दिवसीय ईरान-इजरायल युद्ध के बाद ईरान का मिसाइल भंडार डेढ़ गुना बढ़ गया है। उनके अनुसार, मिसाइलों की गुणवत्ता, मारक क्षमता, रेंज और सटीकता में भी काफी सुधार हुआ है।
मोहेब्बी के मुताबिक, ईरान अब अपनी रक्षा रणनीति को स्थायी प्रतिरोध और असममित युद्ध की अवधारणा पर केंद्रित कर रहा है।उन्होंने कहा कि भविष्य में ईरान पर हमला होने की स्थिति में देश केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आक्रामक कदम भी उठाएगा। दूसरी ओर, ट्रंप ईरान की गहरी भूमिगत परमाणु सुविधा पिकैक्स माउंटेन के खिलाफ अमेरिकी जीबीयू-43/बी एमओएबी यानी ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्स’ के इस्तेमाल पर विचार कर चुके हैं। करीब 9,800 किलोग्राम वजन वाला यह पारंपरिक बम अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु हथियारों में शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह जमीन के ऊपर विस्फोट करने वाला हथियार है और ग्रेनाइट से सुरक्षित गहरी भूमिगत सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करने में इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
अमेरिका नवंबर की शुरुआत तक ईरान के आसपास अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। इसके तहत तीन एयरक्राफ्ट कैरियर, हजारों मरीन, लड़ाकू विमान और विशेष बलों की तैनाती पूरी करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, ट्रंप ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करने का वादा किया था, इसलिए इस समयसीमा का सैन्य फैसलों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका सैन्य दबाव को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत में दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। वहीं, ईरानी वार्ताकार परमाणु मुद्दे पर किसी बड़ी रियायत के लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर नया संघर्ष शुरू होता है तो उसका असर केवल समुद्री जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, संघर्ष का दायरा डेटा सेंटर और समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबलों तक भी फैल सकता है। ऐसे में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और डिजिटल संचार व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देते हैं या बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं।







