मुंबई में जयशंकर और मार्को रुबियो की अहम मुलाकात, व्यापार से लेकर रक्षा तक पर होगी चर्चा
नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
- 20 अक्टूबर को मुंबई में होगी भारत-अमेरिका के विदेश मंत्रियों की वार्ता; ऊर्जा, निवेश और नई तकनीक के साथ वैश्विक मुद्दों पर भी रहेगा जोर
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा देने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई में मुलाकात करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ व्यापार, ऊर्जा, निवेश, रक्षा और आधुनिक तकनीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे समय में होने वाली यह बैठक खास मानी जा रही है, जब दोनों देश आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों पर आपसी तालमेल मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रुबियो की भारत यात्रा दोनों देशों को अपने संबंधों की समीक्षा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर देगी। इसके अलावा, दोनों नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर रहेगी नजर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध इस बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक के दौरान व्यापार से जुड़े मतभेदों को दूर करने और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी दोनों देशों के लिए अहम है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और अमेरिका के साथ व्यापारिक साझेदारी को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने बैठक में किसी विशेष समझौते पर हस्ताक्षर या अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।
मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह मुंबई के अलावा गुजरात के जामनगर भी जाएंगे। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की बड़ी रिफाइनरी स्थित है। यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र और कारोबारी निवेश से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान रहने की उम्मीद है।
रुबियो की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक दोनों पहलुओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में पहले से ही संवाद जारी है। ऐसे में यह बैठक इन क्षेत्रों में आगे की संभावनाओं पर चर्चा का अवसर दे सकती है।
यूएई के विदेश मंत्री से भी मिलेंगे जयशंकर
मुंबई में भारत की कूटनीतिक गतिविधियां केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी भी करेंगे।
भारत और यूएई के बीच होने वाली बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, वित्तीय प्रौद्योगिकी, रक्षा और संपर्क सुविधाओं से जुड़े सहयोग की समीक्षा होने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
एक ही दौरान अमेरिका और यूएई के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ होने वाली ये बैठकें भारत के व्यापक कूटनीतिक संपर्कों को दर्शाती हैं। भारत दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने हितों के अनुरूप सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
दिल्ली के बजाय मुंबई में क्यों हो रही है बैठक?
विदेश मंत्रालय ने मुंबई में बैठक आयोजित करने को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी दिल्ली के बाहर करना कोई नई परंपरा नहीं है। पिछले करीब एक दशक में भारत के अलग-अलग शहरों में भी इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जाती रही हैं।
मुंबई में होने वाली जयशंकर और रुबियो की बातचीत पर राजनीतिक चर्चा भी हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की टिप्पणी के बाद इस प्रस्तावित बैठक को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने बैठक की पुष्टि करते हुए कार्यक्रम की जानकारी दी।
अब सबकी नजर 20 अक्टूबर को होने वाली इस मुलाकात पर है। व्यापार समझौते को लेकर आगे की बातचीत, ऊर्जा सहयोग और रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी जैसे विषय यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत-अमेरिका संबंध आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।







