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मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत

लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में गुरुवार सुबह प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, जिसने देखते ही देखते पूरे आईसीयू को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के समय वार्ड में कई गंभीर मरीज भर्ती थे। घटना के बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रशासन और राहत एजेंसियों को सूचना मिलने के बाद तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया।

आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद लगभग एक घंटे में आग पर काबू पाया जा सका। बचाव कार्य के दौरान आईसीयू से कई मरीजों को बाहर निकाला गया और उन्हें शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि वार्ड में कुल 13 बेड थे, लेकिन वहां 15 मरीज भर्ती थे। हादसे के बाद चार मरीजों के शव मिलने से उनकी मौत की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य मरीजों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की। प्रशासन के अनुसार आईसीयू वार्ड अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित था, जबकि मरीजों के परिजनों के लिए प्रतीक्षालय चौथी मंजिल पर था। इसी वजह से आग लगने के दौरान लोगों को बाहर निकालने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने सभी प्रभावित मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कराई।

हादसे के दौरान अस्पताल में भर्ती एक बुजुर्ग महिला ने साहस का परिचय देते हुए न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि आग लगने की सूचना भी सुरक्षा कर्मियों तक पहुंचाई। बताया जा रहा है कि महिला को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया था। आग और धुएं के बीच उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद बचाव कार्य को गति मिली। उनकी सतर्कता को कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मरीजों के परिजनों ने हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के कई कर्मचारी और चिकित्सक मौके से चले गए, जिससे मरीजों को बाहर निकालने की जिम्मेदारी परिजनों पर आ गई। कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने अपने प्रयासों से मरीजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। परिजनों के अनुसार यदि तत्काल सहायता और उचित व्यवस्था उपलब्ध होती, तो नुकसान को और कम किया जा सकता था।

घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद अग्निशमन प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि सीढ़ियों का एक गेट बंद होने के कारण लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ। परिजनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों के साथ-साथ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की जा रही है। घायल मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दर्दनाक हादसे ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।