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मैरी मिलबेन का बड़ा आरोप, CJP को अमेरिकी फंडिंग का दावा

नेशनल डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।

अमेरिकी गायिका ने भारतीय युवाओं से CJP के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की, दिपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समर्थक मिलबेन ने आरोप लगाया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को अमेरिका में मौजूद ऐसे दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है, जो मोदी के नेतृत्व के विरोधी हैं। उन्होंने भारतीय युवाओं से इस संगठन के खिलाफ संगठित होने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील भी की है। दूसरी ओर, दिपके ने पलटवार करते हुए सवाल उठाया है कि विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया। हालांकि, अमेरिकी फंडिंग के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला कोई सार्वजनिक वित्तीय प्रमाण इन रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। 

‘चुप रहने का समय नहीं’, भारतीय युवाओं से बोलीं मैरी मिलबेन

मैरी मिलबेन ने 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने अभिजीत दिपके और CJP का नाम लेते हुए दावा किया कि संगठन को अमेरिका के ऐसे दानदाताओं से आर्थिक समर्थन मिल रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हैं।

मिलबेन ने युवाओं से चुप न रहने, संगठित होने और CJP की कथित विघटनकारी सोच के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का समर्थन करते हुए कहा कि भारत के युवाओं को देश के लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।

अमेरिकी गायिका ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि कुछ दानदाता दुनिया भर में रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाते हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोग अमेरिका में पढ़े किसी व्यक्ति को चुनते हैं, उसे कट्टरपंथी बनाते हैं, फिर उसके अपने देश लौटने के बाद उसे कथित तौर पर अराजकता फैलाने के लिए आर्थिक मदद देते हैं।

हालांकि, यह मिलबेन का दावा है। उनके सार्वजनिक बयान में CJP को कथित तौर पर पैसा देने वाले दानदाताओं के नाम, लेनदेन का विवरण या किसी वित्तीय दस्तावेज का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस आरोप को फिलहाल प्रमाणित तथ्य के बजाय राजनीतिक दावे के रूप में देखना जरूरी है। 

अभिजीत दिपके का पलटवार, पूछा- भारतीयों को बदनाम करने के लिए अमेरिका का सहारा क्यों?

मैरी मिलबेन के आरोपों के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए सवाल किया कि अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकी समर्थन क्यों मांगा जा रहा है।

दिपके ने विदेशी नागरिकों के भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि भारतीय अपने राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दों को खुद सुलझाने में सक्षम हैं और उन्हें बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

इस तरह विवाद में दो स्पष्ट पक्ष सामने आए हैं। मिलबेन ने CJP पर विदेशी आर्थिक समर्थन लेने का आरोप लगाया है, जबकि दिपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए जवाब दिया है। लेकिन आरोप और उसका जवाब, दोनों अपने आप में फंडिंग की वास्तविक स्थिति का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। इसकी पुष्टि के लिए संगठन के वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। 

आखिर CJP के खिलाफ क्यों हो रहा है विरोध?

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक टकराव है।

CJP और विपक्षी दलों से जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों में किए गए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल हैं और इनका चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग की ओर से पुनरीक्षण प्रक्रिया में हटाई गई प्रविष्टियों के पीछे स्थान परिवर्तन, मृत मतदाता और सत्यापन में नहीं मिल पाए लोगों जैसे कारण बताए गए हैं। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवाल, विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष इस विवाद के अहम हिस्से हैं।

इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात किया गया और दो हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी रॉयटर्स ने दी थी। बाद के दिनों में भी प्रदर्शन और नेताओं की हिरासत को लेकर विवाद जारी रहा। इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया, विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस को और तीखा कर दिया। 

अमेरिका में पढ़ाई और CJP की फंडिंग पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

अभिजीत दिपके की अमेरिका में पढ़ाई और CJP की आर्थिक व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। अगस्त 2026 में दिपके ने अपनी पढ़ाई के खर्च पर सफाई देते हुए कहा था कि बोस्टन विश्वविद्यालय से मिली छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण के जरिए उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा किया।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, दिपके ने अपनी छात्रवृत्ति से संबंधित दस्तावेज भी पत्रकार बरखा दत्त को दिखाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि CJP अपनी गतिविधियों के लिए जनसहयोग यानी क्राउडफंडिंग का सहारा लेगा और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखेगा।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। दिपके की विदेश में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल की गई छात्रवृत्ति या शिक्षा ऋण का सवाल और CJP को कथित तौर पर विदेशी राजनीतिक दान मिलने का आरोप दो अलग-अलग मामले हैं। पहले मामले में दिपके अपनी पढ़ाई के खर्च की सफाई दे चुके हैं, लेकिन इससे पार्टी की मौजूदा फंडिंग के बारे में अपने आप कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

कौन हैं मैरी मिलबेन, जिनके बयान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल?

मैरी मिलबेन अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री हैं, जो देशभक्ति से जुड़े गीतों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अपनी प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं। भारत में उन्हें विशेष पहचान 2023 में मिली, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया था।

मिलबेन कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भारत-अमेरिका संबंधों के समर्थन में बयान दे चुकी हैं। CJP को लेकर उनका ताजा बयान भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में आया है। इस बार उन्होंने केवल प्रधानमंत्री का समर्थन नहीं किया, बल्कि भारतीय युवाओं से एक ऐसे आंदोलन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध खड़ा करने की अपील की है, जिस पर उन्होंने विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया है।

अब सबसे बड़ा सवाल: क्या सामने आएगा फंडिंग का प्रमाण?

मैरी मिलबेन के बयान ने एक राजनीतिक विवाद को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ दे दिया है। एक तरफ चुनावी प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं, दूसरी तरफ CJP को अमेरिकी दानदाताओं से आर्थिक मदद मिलने का आरोप चर्चा में है। दिपके ने इस आरोप के जवाब में विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं।

लेकिन इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अब भी अनुत्तरित है: क्या CJP को वास्तव में अमेरिका से राजनीतिक फंडिंग मिली है?

इस सवाल का जवाब केवल राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि सत्यापित वित्तीय दस्तावेजों, दानदाताओं की जानकारी और संबंधित आधिकारिक जांच से ही मिल सकता है। फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में ऐसा निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है, जो मिलबेन के आरोप को स्थापित कर सके।

लोकतंत्र में सरकार का समर्थन करना हो या उसका विरोध, दोनों के लिए नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है। इसी तरह विदेशी फंडिंग के आरोप भी गंभीरता से जांचे जाने चाहिए, लेकिन प्रमाण के बिना किसी संगठन को विदेशी ताकतों का मोहरा घोषित करना तथ्यात्मक पत्रकारिता के मानकों पर उचित नहीं होगा।