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मोतिहारी: जातीय उन्माद फैलाने की कोशिश नाकाम

लोकल डेस्क, एन के सिंह |

मोतिहारी में जातीय उन्माद फैलाने की कोशिश नाकाम, पुलिस ने हटाये आपत्तिजनक बोर्ड| पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर डीएसपी धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने ब्राह्मणों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले आपत्तिजनक बोर्ड हटा दिए और लिख दिया "मेरा भारत महान"।

पूर्वी चंपारण:  जिले के मोतिहारी स्थित टिकुलिया गांव में जातीय तनाव फैलाने की एक गंभीर कोशिश को मोतिहारी पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर रक्सौल डीएसपी धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विफल कर दिया है। पुलिस ने गांव में ब्राह्मणों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले आपत्तिजनक बोर्ड को हटा दिया और बिजली के खंभों पर लिखे सभी घृणित नारों को मिटाकर "मेरा भारत महान" लिख दिया है। पुलिस की इस तत्परता से गांव वालों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

जातीय उन्माद फैलाने की कोशिश और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

यह घटना तब सामने आई जब टिकुलिया गांव में कुछ असामाजिक तत्वों ने गांव के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगा दिया था, जिसमें लिखा था कि "इस गांव में ब्राह्मणों को पूजा कराना सख्त मना है, पकड़े जाने पर दंड के भागी होंगे।" यह चेतावनी केवल बोर्ड तक सीमित नहीं थी, बल्कि गांव से गुजरने वाले बिजली के खंभों पर भी ऐसे ही संदेश लिखे गए थे, जो एक सुनियोजित और व्यापक विरोध प्रदर्शन का संकेत दे रहे थे।

पुलिस को इस मामले की जानकारी मिलते ही, डीएसपी धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने न केवल विवादित बोर्ड को उखाड़ फेंका, बल्कि बिजली के खंभों पर लिखे सभी आपत्तिजनक स्लोगन को भी पेंट करके मिटा दिया और उनकी जगह "मेरा भारत महान" लिख दिया।

असामाजिक तत्वों की पहचान और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

डीएसपी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि यह कुछ असामाजिक तत्वों की करतूत थी, जिनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस इन लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है कि गांव का एक तथाकथित यूट्यूबर प्रसिद्ध होने के लिए इस तरह की हरकत कर रहा था, जिसे पुलिस ने चिह्नित कर लिया है।

ग्रामीणों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। टिकुलिया गांव निवासी कांग्रेस के पूर्व विधायक रामप्रीत यादव ने बताया कि वह फिलहाल गांव से बाहर हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की करतूत असामाजिक तत्वों द्वारा की गई है और गांव के लोगों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, ग्रामीण सरपंच लक्ष्मी यादव ने कहा कि उनके गांव में एक ब्राह्मण परिवार रहता है और वे सभी मिल-जुलकर एक साथ रहते हैं, किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने इस असामाजिक कार्य की कड़ी निंदा की।

राजद प्रवक्ता के बयान से सुलगी आग और जातीय तनाव की पृष्ठभूमि

यह जातीय तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा था जब हाल ही में राजद के एक प्रवक्ता द्वारा स्वर्ण के पूर्वज ब्रह्मेश्वर मुखिया के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर अभी भी बवाल शांत नहीं हुआ था। ब्रह्मेश्वर मुखिया रणवीर सेना के संस्थापक थे और उनके खिलाफ की गई टिप्पणी ने पहले ही समाज में एक बड़ा विभाजन पैदा कर दिया था। इस बीच, मोतिहारी के आदापुर में ब्राह्मणों को पूजा-पाठ करने से रोकने वाले इस बोर्ड ने आग में घी डालने का काम किया था, जिससे स्थिति और भी विस्फोटक हो गई थी।

ग्रामीणों का स्पष्टीकरण, 'वेद के ज्ञानियों का समर्थन, मांसाहारियों का विरोध'

हालांकि यह प्रतिबंध ब्राह्मण समुदाय पर लगाया गया था, ग्रामीणों का कहना था कि उनका विरोध सभी ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं है। उनका स्पष्टीकरण था कि उनका विरोध उन ब्राह्मणों के खिलाफ है जिन्हें वेद का ज्ञान नहीं है और जो मांस-मदिरा का सेवन करते हैं। वे उन लोगों का समर्थन करते हैं जो वेद के ज्ञाता हैं, भले ही वे किसी भी जाति के क्यों न हों।

इटावा की घटना से जुड़ाव और भविष्य की चिंता

हाल ही में उत्तर प्रदेश के इटावा में कथावाचक मुकुट मणि सिंह यादव के साथ हुई दुर्व्यवहार की घटना ने इस जातीय उन्माद को और हवा दी थी। ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ती हैं और जातिगत भेदभाव को बढ़ाती हैं। यदि समय रहते जिला प्रशासन और सरकार द्वारा इस पर ठोस कदम नहीं उठाया गया होता, तो जानकारों का मानना था कि यह जातीय उन्माद खूनी संघर्ष का रूप ले सकता था, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और भी बिगड़ सकती थी। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस संभावित खतरे को टाल दिया है।