लोकल डेस्क, आर्या कुमारी।
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा पकड़ी गई अवैध मिनी कारतूस फैक्ट्री की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार इस अवैध कारोबार का नेटवर्क सिर्फ बिहार के कई जिलों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि नेपाल में सक्रिय अपराधियों तक भी फैला हुआ था। पुलिस का कहना है कि फैक्ट्री का मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह लंबे समय से संगठित तरीके से कारतूस तैयार कर उनकी आपूर्ति कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रीकांत सिंह कारतूस निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन, धातु, बारूद और अन्य जरूरी सामग्री देश के अलग-अलग हिस्सों से ऑनलाइन मंगाता था। इनमें नाइट्रिक एसिड, रेड फॉस्फोरस, सल्फ्यूरिक एसिड, सेलूलोज, चारकोल, गन पाउडर और पीतल जैसी सामग्री शामिल है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन प्रतिबंधित और संवेदनशील रसायनों की खरीद किन खातों से की गई, किस पते पर उनकी डिलीवरी हुई और संबंधित कंपनियों ने बिक्री के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे इस गिरोह के नेपाल कनेक्शन की पुष्टि हुई है। पुलिस को आशंका है कि तैयार कारतूस पूर्वी और पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर सहित बिहार के कई जिलों में आपूर्ति किए जाते थे, जबकि नेपाल में सक्रिय अपराधियों तक भी इनकी खेप पहुंचाई जाती थी। इसी आधार पर अब बिहार और नेपाल में सक्रिय अपराधियों के पूरे नेटवर्क की पहचान की जा रही है। इस मामले में पुलिस की विशेष टीम गोपनीय तरीके से जांच और छापेमारी अभियान चला रही है।
पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि फेनहारा थाना क्षेत्र का रहने वाला श्रीकांत सिंह पिछले करीब 14 वर्षों से अवैध हथियार और कारतूस के कारोबार से जुड़ा हुआ था। वर्ष 2012 में वह मुजफ्फरपुर में गिरफ्तार भी हुआ था, लेकिन जमानत मिलने के बाद उसने अपना ठिकाना बदल लिया। करीब चार वर्ष पहले उसने चकिया में परिवार के साथ रहने के बहाने किराए पर मकान लिया। कुछ समय बाद परिवार को वहां से हटाकर वह अकेले रहने लगा और उसी मकान में गुप्त रूप से कारतूस बनाने की फैक्ट्री संचालित करने लगा।
पुलिस के अनुसार संदेह से बचने के लिए श्रीकांत ने चकिया थाना के पास लेथ मशीन की एक दुकान भी खोल रखी थी। बाहर से वह सामान्य मशीन का काम करता था, जबकि रात के समय अवैध कारतूस निर्माण का धंधा चलता था। छापेमारी के दौरान दुकान से भी एक कारतूस बरामद हुआ, जिससे पुलिस को आशंका है कि उसका इस्तेमाल ग्राहकों को नमूना दिखाने के लिए किया जाता था। मकान मालिक ने केवल आधार कार्ड देखने के बाद घर किराए पर दिया था और उन्हें भी इस अवैध गतिविधि की भनक नहीं लगी।
रविवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। मौके से मुख्य आरोपित श्रीकांत सिंह समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान दो देसी कट्टे, 205 तैयार कारतूस, 1063 खाली कारतूस, 303 पिलेट, कारतूस निर्माण में प्रयुक्त रसायन, सात अर्द्धनिर्मित मैगजीन, दो अर्द्धनिर्मित पिस्तौल के बैरल, लेथ मशीन तथा अन्य उपकरण बरामद किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि जब्त किए गए रसायनों का मिश्रण अत्यंत विस्फोटक और जानलेवा हो सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई चेन और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।






